*TV20 NEWS || AZAMGARH: “साहित्य के स्वर्णिम पन्नों में मेरी कहानी ‘कार्यालय की मीटिंग’ का प्रकाशन — 126 वर्ष पुरानी त्रैमासिक सरस्वती में योगदान का गौरव”*
बड़े हर्ष के साथ सूचित कर रहा हूं कि भारत के हिन्दी साहित्य के इतिहास के 126 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर चुकी वर्तमान की त्रैमासिक पत्रिका *सरस्वती* के नए अंक अप्रैल -जून 2025 में मेरी कहानी*कार्यालय की मीटिंग* का प्रकाशन पृष्ठ संख्या 69 -75 पर हुआ है।यह पत्रिका प्रयागराज से प्रकाशित हो रही है।ध्यातव्य है कि इस पत्रिका की शुरुआत 1899 में जगन्नाथ दास रत्नाकर के संपादन में हुई थी।इस सम्मानित पत्रिका के आधार स्तंभ संपादक: महावीर प्रसाद द्विवेदी 1903 -1920 तक रहें हैं।इस पत्रिका के हिंदी साहित्य में किए गए कार्य को *स्वर्णिम युग*के रूप में देखा जाता है।आचार्य शुक्ल ने इस पत्रिका के सम्बन्ध में लिखा है कि ‘ सरस्वती पत्रिका प्रारंभिक काल का विश्व कोश है।’ सुमित्रानंदन पंत जी ने इस पत्रिका के संबंध में कहा कि ‘ सरस्वती पत्रिका तब की हिंदी की सर्वश्रेष्ठ और उच्च कोटि की मासिक पत्रिका रही है।’इस पत्रिका में मेरे आराध्य लेखकीय गुरु कथाकार सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ सौत’ का प्रकाशन दिसंबर 1915 में हुआ था।वर्तमान में 110 वर्ष बाद उनके शिष्य के रूप में मेरी कहानी **कार्यालय की मीटिंग* का इस पत्रिका में स्थान प्राप्त करना मेरे लिए सुखद एहसास है।इस साहित्य की पत्रिका का प्रकाशन 1980 में कुछ अपरिहार्य कारणों से बंद हो गया था।ठीक 40 वर्ष के बाद 2020 से इस गौरवशाली पत्रिका का पुनः प्रकाशन डॉ0देवेंद्र शुक्ल के संपादन में प्रयागराज से शुरू हुआ।जनवरी सन 2022 से इस लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका का संपादन श्री रवि नंदन सिंह जी और श्री अनुपम परिहार जी कर रहे हैं।
मैं सरस्वती पत्रिका के प्रारंभ के सभी संपादक को सादर प्रणाम निवेदित करते हुए वर्तमान संपादक श्री रवि नंदन सिंह जी,श्री अनुपम परिहार जी और प्रकाशन से जुड़े सभी पत्रिका परिवार के साहित्य जन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे इस गौरवशाली पत्रिका*सरस्वती* में एक कथाकार के रूप में स्थान दिया।सादर।





