*TV20 NEWS || AZAMGARH :आजमगढ़ में नैनो उर्वरकों पर कृषि अधिकारियों का प्रशिक्षण, मृदा संरक्षण व टिकाऊ खेती पर जोर*

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आजमगढ़ 30 जनवरी– धरती माता बचाओ अभियान के तहत नैनो उर्वरको के महत्व एवं उपयोग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आज कृषि विभाग के अधिकारी गणों हेतु कृषि भवन सभागार जनपद आजमगढ़ में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संयुक्त कृषि निदेशक, आजमगढ़ मंडल, आजमगढ़ श्री गोपाल दास जी रहे।

कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी, आजमगढ़ डॉ. गगनदीप सिंह, वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक, इफको गोरखपुर डॉ. विनोद कुमार सिंह, श्री हरिकेश मालवीय (एसटीए, कृषि विभाग), कृषि सलाहकार डॉ. रामकेवल यादव, श्री शंभू नाथ सिंह (एसटीए), डॉ अभिमन्यु यादव एडीएसटी कृषि विभाग, डॉ मुलायम यादव शोध कार्यालय आजमगढ़,क्षेत्र प्रबंधक, इफको आजमगढ़ श्री जियाउद्दीन सिद्दीकी, सहित जनपद के समस्त विकास खंडों के ए.डी.ओ. कृषि एवं एडीओ पीपी शुभम सिंह एसएफए इफको सहित 100 के संख्या में केंद्र प्रभारी ने भाग लिया।

संयुक्त कृषि निदेशक, आजमगढ़ मंडल ने अपने संबोधन में कहा कि नैनो उर्वरक मृदा में पोषक तत्वों के अनावश्यक जमाव को रोकते हैं, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति लंबे समय तक बनी रहती है। नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसलों में पोषक तत्वों की बर्बादी कम, पौधों की सहनशीलता अधिक तथा जल उपयोग दक्षता में सुधार देखने को मिलता है।
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी, आजमगढ़ डॉ. गगनदीप सिंह ने किसानों से आग्रह करते हुए कहा गया कि मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखे एवं रसायनिक खादों का प्रयोग संतुलित मात्रा में करें,फसल अवशेष को उचित प्रबंध कर मिट्टी में ही मिलाए, जैविक खादों का अधिक से अधिक प्रयोग करें,फसल चक्र अपनाए ,फसल अवशेष को न जलाए जिससे धरती माता का स्वास्थ्य बना रहे।
उनके द्वारा नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों का व्यापक प्रचार प्रसार करने तथा व्यवहारिक लाभों एवं आधुनिक एवं लाभकारी खेती हेतु किसानों को अग्रसर होने हेतु कहा गया।
डॉ. विनोद कुमार सिंह, वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक, इफको गोरखपुर ने बताया कि नैनो यूरिया का अवशोषण पौधों द्वारा तेज़ी एवं अधिक प्रभावी ढंग से होता है, जिससे कम मात्रा में भी पौधों को आवश्यक नाइट्रोजन उपलब्ध हो जाती है। वहीं नैनो डीएपी बीज शोधन के दौरान बीज के साथ जुड़कर पौधों को प्रारंभिक वृद्धि चरण से ही संतुलित पोषण प्रदान करता है।

कार्यक्रम का संचालन क्षेत्र प्रबंधक, इफको आजमगढ़ द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में नैनो उर्वरकों की वैज्ञानिक अवधारणा, उनकी कार्यप्रणाली एवं व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार नैनो तकनीक आधारित उर्वरक परंपरागत उर्वरकों की तुलना में अधिक दक्ष, पर्यावरण के अनुकूल एवं किसानों के लिए लागत प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने दानेदार यूरिया एवं डीएपी के असंतुलित एवं अत्यधिक प्रयोग से उत्पन्न होने वाली मृदा क्षरण, पोषक तत्व हानि एवं उत्पादन लागत में वृद्धि जैसी समस्याओं की ओर भी अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया।