*TV20 NEWS|| PRAYAGRAJ :2 अन्य सवालों पर आब्जेक्शन को HC ने किया खारिज, पहले राउंड की काउंसिलिंग के बाद प्रवेश ले चुके छात्रों पर नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव*

CLAT-UG : 1 सवाल के 2 जवाब, Oversight Committee का फैसला रद, Expert Committee के फैसले पर नई मेरिट लिस्ट तैयार करने के आदेश

2 अन्य सवालों पर आब्जेक्शन को HC ने किया खारिज, पहले राउंड की काउंसिलिंग के बाद प्रवेश ले चुके छात्रों पर नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव

CLAT-UG : 1 सवाल के 2 जवाब, Oversight Committee का फैसला रद, Expert Committee के फैसले पर नई मेरिट लिस्ट तैयार करने के आदेश

सब्जेक्ट Expert Committee ने आपत्ति को स्वीकार किया और यह निष्कर्ष निकाला कि एक सवाल के दो ऑप्शन ‘B’ और ‘D’ सही थे. ओवरसाइट कमेटी द्वारा चुनौती दिए गए सवाल के संबंध में Expert Committee के फैसले को पलटने का कोई कारण नहीं बताया गया, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए और Expert Committee के जवाबों को बरकरार रखा जाना चाहिए. यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक सरन ने कैंडीडेट अवनीश गुप्ता की तरफ से दाखिल रिट याचिका को आंशिक तौर पर स्वीकार करते हुए सुनाया है.

बेंच ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कंसोर्टियम को CLAT-UG-2026 के लिए मेरिट लिस्ट को बदलने का निर्देश दिया है लेकिन यह भी कहा है कि काउंसिलिंग के बाद जिन छात्रों को प्रवेश दिया जा चुका है, उन्हें परेशान नहीं किया जायेगा. नई मेरिट लिस्ट एक महीने के भीतर तैयार की जायेगी.

यह आदेश तब दिया गया बेंच ने पाया कि हाई-पावर्ड ‘ओवरसाइट कमेटी’ ने बिना कोई कारण बताए एक विवादित सवाल के बारे में सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स (Expert Committee) के फैसले को मनमाने ढंग से पलट दिया. जस्टिस विवेक सरन की सिंगल बेंच ने कंसोर्टियम को आदेश दिया कि विवादित सवाल नंबर 9 (बुकलेट-C में) और CLAT-2026 एंट्रेंस एग्जाम की अलग-अलग बुकलेट में उसी से जुड़े सभी सवालों के लिए दो ऑप्शन (‘B’ और ‘D’) को सही माने और इसके आधार पर नई मेरिट लिस्ट तैयार करे.

बता दें कि CLAT-2026 का आयोजन 7 दिसंबर, 2025 को किया गया था. याचिकाकर्ता अवनीश गुप्ता भी इस परीक्षा में शामिल हुआ. उसे टेस्ट बुकलेट सिरीज-C के सवाल नंबर 6, 9 और 13 (मास्टर बुकलेट-A के सवाल 88, 91 और 95 के बराबर) पर आब्जेक्शन रेज किया. उसके आब्जेक्शन पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गयी तो उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल करके इसे चुनौती दी.

सुनवाई के बाद कोर्ट ने सवाल संख्या 6 और 13 में दखल देने से इनकार कर दिया. बेंच ने लॉजिकल रिजनिंग के सवाल संख्या 9 को चुनौती दिये जाने में दम पाया. कोर्ट ने माना कि ओवरसाइट कमेटी ने Expert Committee के फैसले को पलट दिया और बिना कोई कारण बताए उक्त सवाल के लिए सही ऑप्शन के तौर पर आंसर ‘B’ बरकरार रखा.

Expert Committee के फैसले को खारिज करते समय निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कोई कारण दर्ज नहीं किया

बेंच ने स्टेट ऑफ राजस्थान बनाम राजेंद्र प्रसाद जैन 2008 और स्टेट ऑफ उड़ीसा बनाम धनीराम लुहार 2004 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासनिक आदेशों को भी कारणों से समर्थित होना चाहिए ताकि निर्णय लेने वाले के मन को निष्कर्ष से जोड़ा जा सके.

“रिपोर्ट के आखिरी पेज पर Expert Committee के सदस्यों का विवरण दिया गया जो इस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, जबकि ओवरसाइट कमेटी के सदस्य पहले के उच्च पदाधिकारी हैं. चूंकि उक्त एक्सपर्ट कमेटी (Expert Committee) के फैसले को खारिज करते समय निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कोई कारण दर्ज नहीं किया गया इसलिए यह स्थापित कानून के विपरीत है.”
कोर्ट ने टिप्पणी

याचिका पर मेरिट के आधार पर सुनवाई करने से पहले कोर्ट ने कंसोर्टियम द्वारा उठाई गई प्रारंभिक आपत्ति खारिज कर दी जिसमें कंसोर्टियम ने तर्क दिया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास वर्तमान याचिका पर सुनवाई करने का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं है.

कंसोर्टियम कर्नाटक में रजिस्टर्ड है और उसने सभी प्रक्रियाएं उसी राज्य में पूरी की. इस तर्क को खारिज करते हुए कोर्ट ने कुसुम इंगोट्स एंड अलॉयज लिमिटेड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 2004 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता गाजियाबाद यूपी में प्रवेश परीक्षा में शामिल हुआ इसलिए कार्रवाई का एक हिस्सा हाईकोर्ट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में आता है. इसलिए कोर्ट के पास इस मामले की सुनवाई और उस पर फैसला देने का पूरा अधिकार है.

दिशा पांचाल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 2018 मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए जस्टिस सरन ने साफ किया कि मेरिट लिस्ट को रिवाइज करते समय काउंसलिंग का पहला राउंड जो पहले ही फाइनल हो चुका है, में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. इसके बाद ही स्थिति में कंसोर्टियम को सभी उम्मीदवारों के लिए विवादित प्रश्न के लिए ‘B’ और ‘D’ दोनों को सही मानकर अंकों की दोबारा गणना की जाएगी.

“प्रतिवादी/नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कंसोर्टियम को बुकलेट-C के प्रश्न संख्या 9 के लिए अंक देकर मेरिट लिस्ट को रिवाइज करने का निर्देश दिया जाता है जिसमें ‘B’ और ‘D’ दोनों को सही उत्तर माना जाए. चूंकि बाद में यह बताया गया कि काउंसलिंग का पहला राउंड पहले ही फाइनल हो चुका है, इसलिए जिन स्टूडेंट्स/उम्मीदवारों ने पहले राउंड की काउंसलिंग के बाद एडमिशन ले लिया है, उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा.”
आदेश में बेंच ने कहा