*TV20 NEWS || AZAMGARH :15 फरवरी 2026 तक बढ़ा राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0, आजमगढ़ में सुलह-समझौते से त्वरित न्याय पर ज़ोर*
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, आजमगढ़।
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आजमगढ़ 06 फरवरी– मा0 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वाधान में सम्पूर्ण राष्ट्र में राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0 चलाया जा रहा है। उक्त अभियान का उद्देश्य मध्यस्थता के माध्यम से न्यायालयों में लम्बित प्रकरणों का अधिकाधिक संख्या में निस्तारण कराना है। मा0 जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आजमगढ़ के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जनपद न्यायालय, आजमगढ़ में संचालित मध्यस्थता अभियान का सफल आयोजन कराया जा रहा है।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती नितिका राजन द्वारा मध्यस्थता के सफल आयोजन हेतु मध्यस्थगण के साथ बैठक आहूत कर अधिक से अधिक वादों को मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारित कराये जाने का निर्देश दिया गया। मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 की अवधि बढ़ाकर 15 फरवरी, 2026 तक कर दी गयी है। इस अभियान के तहत न्यायालयों में लम्बित मामलों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण निस्तारण सुलह समझौते के माध्यम से कराया जा रहा है।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बताया गया कि मध्यस्थता हेतु चिन्हित पत्रावलियों को संदर्भित किये जाने के लिए 15 दिवस की अवधि बढा दी गयी है, जो 1 फरवरी, 2026 से 15 फरवरी, 2026 तक प्रभावी रहेगी। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि इस अवधि में अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण सुलह वार्ता के माध्यम से सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से समस्त न्यायालयों को पत्र प्रेषित किया गया है कि वह अपने यहा लम्बित उपयुक्त मामलों की पत्रावलियों को मध्यस्थता के लिए संदर्भित करें। साथ ही वाह्य न्यायालयों से भी पत्रावलियां भेजे जाने की अपेक्षा की गयी है, ताकि अधिकतम संख्या में वादकारियों को इस अभियान का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता प्रक्रिया के माध्यम से विवादों का समाधान न केवल शीघ्र होता है, बल्कि इसमें पक्षकारों के बीच आपसी सौहार्द भी बना रहता है।
अभियान का उद्देश्य न्यायालयों पर लम्बित मामलों का बोझ कम करना है और आमजन को सस्ता, सरल एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आमजन से अपील की है कि वे अपने विवादों के समाधान के लिए इस अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और सुलह-समझौते के जरिए मामलों का निस्तारण करायें।





