*TV20 NEWS || AZAMGARH :शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर उठाए सवाल*

सपा के विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने पूर्वांचल एक्सप्रेस की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं अक्सर बहस का केंद्र रही हैं। इसी क्रम में Uttar Pradesh Legislative Council में सपा के विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने पूर्वांचल एक्सप्रेस की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इतनी बड़ी और महत्त्वाकांक्षी परियोजना पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, इसलिए इसकी निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर किसी भी प्रकार की शंका नहीं रहनी चाहिए।

गुणवत्ता पर उठाए गए मुख्य सवाल

जमाली ने सदन में कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस प्रदेश के पूर्वी हिस्से के विकास की रीढ़ के रूप में प्रस्तुत की गई थी। सरकार ने इसे रोजगार, निवेश और बेहतर कनेक्टिविटी का माध्यम बताया था। लेकिन हाल के समय में सामने आई कुछ घटनाओं—जैसे सड़क की परत उखड़ने, जलभराव और रखरखाव संबंधी शिकायतों—ने इसकी गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं।

उन्होंने मांग की कि:

 

 

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

 

 

परियोजना में शामिल एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए।

 

 

एक्सप्रेसवे के नियमित ऑडिट और तकनीकी निरीक्षण की रिपोर्ट सदन में पेश की जाए।

 

 

सरकार से पारदर्शिता की मांग

विधायक ने कहा कि जनता के टैक्स के पैसों से बनी परियोजनाओं में पारदर्शिता अनिवार्य है। यदि कहीं निर्माण में मानकों से समझौता हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था या नहीं।

क्षेत्रीय विकास से जुड़ी अपेक्षाएं

पूर्वांचल क्षेत्र लंबे समय से औद्योगिक और आधारभूत विकास के मामले में अपेक्षाकृत पिछड़ा माना जाता रहा है। ऐसे में यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क परियोजना नहीं बल्कि पूर्वी Uttar Pradesh के आर्थिक कायाकल्प का प्रतीक माना गया। जमाली ने कहा कि यदि गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो इससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित होगा और क्षेत्रीय विकास की गति धीमी पड़ सकती है।

राजनीतिक संदर्भ

सदन में यह मुद्दा उठने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। सत्ता पक्ष ने परियोजना को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह प्रदेश के विकास का मॉडल है, जबकि विपक्ष ने इसे “दिखावटी विकास” करार देते हुए ठोस जांच की मांग दोहराई।

निष्कर्ष

पूर्वांचल एक्सप्रेस जैसी बड़ी परियोजनाएं किसी भी राज्य की प्रगति का प्रतीक होती हैं। ऐसे में उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा से समझौता न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि जनविश्वास को भी कमजोर कर सकता है। विधान परिषद में उठी यह बहस इस बात का संकेत है कि बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं पर निरंतर निगरानी और पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है।