*TV20 NEWS|| LUCKNOW :🌐 इंटरनेशनल साइबर क्राइम कॉन्फ्रेंस 2026 में गूंजा संदेश—तकनीक तभी सुरक्षित, जब कानून साथ! 🚨*

इंटरनेशनल साइबर क्राइम कॉन्फ्रेंस 2026 का हुआ आयोजन
तकनीक को कानून से जोड़ना जरूरी, बिना कानून के तकनीक अधूरी: डॉ. जी. के. गोस्वामी
साइबर अपराध की नवीन प्रवृत्तियों और कानून पर हुई चर्चा
देश के विभिन्न भागों से साइबर विशेषज्ञ, शिक्षक एवं विद्यार्थियों ने किया प्रतिभाग
लखनऊ। साइबर टेक्नो अटॉर्नीज एवं शिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को इंटरनेशनल साइबर क्राइम कॉन्फ्रेंस 2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन में साइबर अपराध, डिजिटल गोपनीयता, ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर कानून तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी नई चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
सम्मेलन के प्रथम सत्र में उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक तथा उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान, लखनऊ के संस्थापक निदेशक डॉ. जी. के. गोस्वामी (आईपीएस) ने कहा कि जब तकनीक कानून के साथ जुड़ती है, तभी जनमानस का उस पर विश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा कि “बिना कानून के तकनीक अधूरी है, जबकि कानून तकनीक में अनुशासन पैदा करता है और उसे समाज के लिए अधिक उपयोगी बनाता है।”
डॉ. गोस्वामी ने कहा कि आज उपकरण अत्यधिक बुद्धिमान हो रहे हैं, किंतु आवश्यकता इस बात की है कि मनुष्य स्वयं अधिक सजग बने। उन्होंने यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्राप्त जानकारी को अंतिम सत्य मानने के बजाय उसकी सत्यता की पुष्टि करना आवश्यक है। उन्होंने साइबर अपराध की नवीन प्रवृत्तियों पर भी विस्तार से चर्चा की।
नेपाल सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल के वाइस प्रेसिडेंट सप्तकोटा ने कहा कि साइबर अपराध अब वैश्विक समस्या बन चुका है और नेपाल भी इससे अछूता नहीं है। उन्होंने बताया कि नेपाल सरकार बड़े स्तर पर साइबर अपराधों को नियंत्रित करने के लिए कार्य कर रही है। नेपाल से आए एडवोकेट शाहिल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
द एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ के डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कानूनी व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ नियामक संतुलन बनाना आवश्यक है, ताकि नवाचार भी बढ़े और नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे।
साइबर विशेषज्ञ मोहम्मद हसन ज़ैदी ने “महिलाओं और बच्चों से जुड़े कानून की जटिलताओं” विषय पर चर्चा की। वहीं डॉ. सृजन मिश्रा ने सामाजिक माध्यमों के नियमन तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम कानूनी नियंत्रण पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए अधिकार और जिम्मेदारी दोनों का समान रूप से पालन आवश्यक है।
अहमद मेहंदी ने साइबर सिक्योरिटी पर व्याख्यान दिया। इसी क्रम में सना नासिर ने साइबर धमकी और ऑनलाइन उत्पीड़न के मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल उत्पीड़न का शिकार होने वाले व्यक्तियों को मानसिक सहयोग, परामर्श और सामाजिक समर्थन देना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि सामाजिक माध्यमों पर अपराध की प्रवृत्तियाँ लगातार बदल रही हैं, इसलिए रोकथाम के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ जन-जागरूकता भी आवश्यक है।
गोरखपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. आदिल अंसारी ने वैश्विक साइबर अपराध के परिदृश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में डॉ. अंशुमाली शर्मा, संगीता शर्मा, आंचल गुप्ता समेत अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन न्यूज़ एंकर मुमताज ने किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. मिर्जा यासूब अब्बास ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर भुवन भास्कर श्रीवास्तव, डॉ. एजाज अतर, प्रोफेसर शादिक रजा समेत तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे।