आजमगढ़ः 18 फरवरी, 2026– प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रदान किया गया दिव्यांग शब्द केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि नए भारत की उस सोच का परिचायक है जो दिव्यांगजन को अक्षम नहीं, बल्कि अनंत प्रतिभा और साहस का धनी मानती है। उत्तर प्रदेश सरकार इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए प्रदेश के प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति के स्वावलम्बन, सम्मान और सुरक्षा के लिए दृढ़संकल्पित है। आज का नया उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन की हिम्मत और सफलता को अपनी शक्ति मानकर उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
प्रदेश में दिव्यांगजन की सुविधाओं के लिए सरकारी भवनों, परिवहन और सार्वजनिक स्थलों को बैरियर-फ्री बनाया जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था को सुलभ बनाने के लिए व्यापक अभियान जारी है। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ उन तक तीव्र गति से पहुँचाया जा रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हमारे सामने है-चाहे वह पैरा ओलंपिक में देश के लिए सर्वाधिक मेडल जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव हों, या दृष्टिबाधित होने के बावजूद आई.ए.एस. के रूप में उत्कृष्ट कार्य कर रहे चित्रकूट के मण्डलायुक्त। ये सफलताएं सिद्ध करती हैं कि संकल्प शक्ति और आत्मबल ही असली सामर्थ्य है।
आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। वर्ष 2017 से पूर्व जहाँ लगभग 08 लाख दिव्यांगजन को मात्र 300 रुपये महीने पेंशन मिलती थी, वहीं आज 11 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1,000 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं, जो डी.बी.टी. के माध्यम से सीधे उनके खातों में पहुँच रहे हैं। कुष्ठ रोग से ग्रसित दिव्यांगजन की पेंशन को भी बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। सहायक उपकरणों की उपलब्धता को सहज बनाने के लिए प्रत्येक मण्डल मुख्यालय पर डी.डी.आर.सी. (DDRC) की स्थापना की गई है, जहाँ से ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और हियरिंग-एड जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ दिव्यांगजन की उच्च शिक्षा के लिए दो समर्पित विश्वविद्यालय-डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (लखनऊ) और जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय (चित्रकूट) संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में राज्याधीन सेवाओं में 04 प्रतिशत और शिक्षण संस्थानों में 05 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यू.डी.आई.डी.) पोर्टल पर अब तक 16 लाख 23 हजार से अधिक कार्ड निर्गत कर उन्हें पहचान दी गई है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘कॉक्लियर इम्प्लाण्ट योजना’ एक क्रांतिकारी कदम साबित हुई है। इस योजना के तहत मूकबधिर बच्चों के शल्य चिकित्सा हेतु 06 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है, जिससे वे सुनने और बोलने में सक्षम होकर सामान्य जीवन जी सकें। साथ ही, मानसिक दिव्यांगजन के लिए बरेली, मेरठ, गोरखपुर और लखनऊ जैसे शहरों में विशेष आश्रय गृह व प्रशिक्षण केन्द्र संचालित हैं। ’प्रयास’, ’संकेत’, ’ममता’ और ’स्पर्श’ जैसे राजकीय विद्यालयों के माध्यम से हजारों छात्र-छात्राएं अपना भविष्य संवार रहे हैं। विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार और स्वरोजगार हेतु वित्तीय सहायता जैसी योजनाओं ने दिव्यांगजन के जीवन में विश्वास और गौरव का नया संचार किया है।





