TV 20 NEWS || NEW DELHI : ज्यूडिशियल काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ‘बहुत देर होने से पहले’ कार्रवाई की मांग की ।
नई दिल्ली (न्यूज़ वार्ता) : ज्यूडिशियल काउंसिल ने औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और तात्कालिक संचार भेजते हुए इज़राइल–संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तथा तेजी से बढ़ते युद्ध को रोकने के लिए तुरंत और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है।
अपने पत्र में ज्यूडिशियल काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आग्रह किया है कि वह आपातकालीन बैठक बुलाए और तत्काल युद्धविराम के लिए एक बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करे। ज्यूडिशियल काउंसिल ने चेतावनी दी है कि यदि अब भी निष्क्रियता बनी रही, तो इसके वैश्विक स्तर पर विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। स्थिति के और अधिक बिगड़ने के मद्देनज़र ज्यूडिशियल काउंसिल ने अपनी गहरी चिंता दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि अब विचार-विमर्श का समय समाप्त हो चुका है—अब तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।
पिछले कुछ सप्ताहों में यह संघर्ष अत्यंत तीव्र हो गया है, जिसमें बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान, जवाबी मिसाइल हमले और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विनाश की खबरें सामने आई हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए समन्वित हमलों के बाद भारी जवाबी कार्रवाई हुई, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा और नागरिकों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ।
ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा, “हालिया घटनाक्रम एक खतरनाक बढ़ोतरी की ओर संकेत करते हैं, जिसमें सैन्य गतिविधियों का विस्तार, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर खतरा और क्षेत्रीय अस्थिरता में वृद्धि शामिल है। व्यापक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का जोखिम अब केवल कल्पना नहीं, बल्कि आसन्न वास्तविकता बन चुका है, जिससे वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर दबाव पड़ रहा है।”
ज्यूडिशियल काउंसिल ने इस संघर्ष के कारण उत्पन्न हो रहे मानवीय संकट पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। नागरिक आबादी हिंसा का सबसे अधिक भार झेल रही है, जहां लगातार बढ़ती मौतों और बुनियादी ढांचे के विनाश ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
अपने पत्र में ज्यूडिशियल काउंसिल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके परिणाम केवल इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे। और चेतावनी दी है कि लंबा चलता संघर्ष वैश्विक शांति को अस्थिर कर सकता है, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बाधित कर सकता है और पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को गंभीर संकट में धकेल सकता है।
श्री राजीव अग्निहोत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से निम्नलिखित कदम उठाने का आह्वान किया है:
बिना किसी देरी के आपातकालीन बैठक बुलाना
एक बाध्यकारी और प्रभावी युद्धविराम प्रस्ताव पारित करना
संबंधित देशों के बीच प्रत्यक्ष कूटनीतिक वार्ता शुरू करना नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करना,ज्यूडिशियल काउंसिल ने यह भी रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पर वैश्विक शांति और सुरक्षा को खतरे में डालने वाले संघर्षों को रोकने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। इस महत्वपूर्ण समय पर चुप्पी या विलंबित कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय दायित्व की विफलता माना जाएगा।
ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री अग्निहोत्री ने कहा, “दुनिया एक खतरनाक मोड़ पर खड़ी है। यदि तुरंत और निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे पूरा विश्व प्रभावित होगा। दुनिया एक अत्यंत खतरनाक मोड़ पर खड़ी है। यह संघर्ष अब एक भू-राजनीतिक विवाद से बढ़कर वैश्विक संकट का रूप ले चुका है, जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।जिनमें तेल की बढ़ती कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा, बढ़ती महंगाई और वित्तीय अस्थिरता शामिल हैं। अग्निहोत्री ने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो दुनिया एक लंबे आर्थिक संकट और मानवीय कठिनाइयों के दौर में प्रवेश कर सकती है,जिसका सबसे अधिक असर विकासशील देशों और कमजोर वर्गों पर पड़ेगा”।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने न्याय, शांति और विधि के शासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सभी वैश्विक संस्थाओं से राजनीतिक विचारों से ऊपर उठकर मानवता की रक्षा करने का आग्रह किया ।





