नई दिल्ली (न्यूज़ वार्ता): ज्यूडिशियल काउंसिल ने देशभर में न्याय तक पहुंच को मजबूत बनाने, कानूनी जागरूकता बढ़ाने और जनसहायता सेवाओं को विस्तार देने के उद्देश्य से विभिन्न शहरों में लीगल एड सेंटर खोलने की घोषणा की है। इस महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत शीघ्र ही नई दिल्ली, देहरादून, कानपुर, लखनऊ, फतेहपुर, जयपुर, सुल्तानपुर, इटावा और भरतपुर में लीगल एड सेंटर कार्य प्रारम्भ करेंगे।
यह विस्तार ज्यूडिशियल काउंसिल की उस निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके माध्यम से समाज के हर वर्ग तक कानूनी सहायता पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है, विशेषकर गरीब, वंचित, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, मजदूर, विद्यार्थी तथा अन्याय के पीड़ित लोग, जिन्हें समय पर कानूनी मार्गदर्शन प्राप्त करने में अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रस्तावित लीगल एड सेंटर समर्पित जनसहायता केंद्रों के रूप में कार्य करेंगे, जहां नागरिकों को प्रारंभिक कानूनी परामर्श, दस्तावेज़ी मार्गदर्शन, शिकायत निवारण सहायता, कानूनी जागरूकता सामग्री तथा उनके संवैधानिक और विधिक अधिकारों को समझने में सहायता प्रदान की जाएगी। ये केंद्र नागरिक विवाद, पारिवारिक मामलों, उपभोक्ता शिकायतों, साइबर शिकायतों, वरिष्ठ नागरिक संरक्षण, महिला अधिकार, बाल कल्याण, श्रम विवाद और जनहित से जुड़े मामलों में भी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा,
“इन केंद्रों की स्थापना का उद्देश्य नागरिकों और न्याय व्यवस्था के बीच की दूरी को कम करना है, ताकि जमीनी स्तर पर लोगों को कानूनी जानकारी और प्रक्रियात्मक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर नागरिक तक उसके द्वार पर पहुंचना चाहिए। इन लीगल एड सेंटरों के माध्यम से ज्यूडिशियल काउंसिल लोगों को कानूनी जागरूकता और त्वरित सहायता प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना चाहती है, ताकि कोई भी व्यक्ति केवल जानकारी या संसाधनों की कमी के कारण न्याय से वंचित न रहे।”
अग्निहोत्री ने आगे बताया कि प्रत्येक केंद्र का संचालन अधिवक्ताओं, स्वयंसेवकों, सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा समाज सेवा की भावना रखने वाले लोगों के सहयोग से किया जाएगा, जिससे आम जनता को जिम्मेदार और सुव्यवस्थित सहायता मिल सके।
इन केंद्रों के माध्यम से कानूनी साक्षरता शिविर, भ्रष्टाचार विरोधी जागरूकता अभियान, महिला एवं बाल संरक्षण कार्यशालाएं, वरिष्ठ नागरिक सहायता प्रकोष्ठ तथा युवाओं के लिए विधिक शिक्षा कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, इन केंद्रों द्वारा शैक्षणिक संस्थानों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और नागरिक समाज के समूहों के साथ सहयोग कर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
प्रत्यक्ष (वॉक-इन) कानूनी सहायता के अतिरिक्त, इन केंद्रों में टेलीफोनिक मार्गदर्शन और शिकायत सहायता प्रणाली भी शुरू की जाएगी, जिससे आसपास के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोग भी बिना देरी के सहायता प्राप्त कर सकें।
ज्यूडिशियल काउंसिल का मानना है कि राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली, देहरादून, लखनऊ, जयपुर सहित कानपुर, फतेहपुर, सुल्तानपुर, इटावा और भरतपुर जैसे प्रमुख क्षेत्रीय शहरों में इन केंद्रों की स्थापना से उत्तर भारत में नागरिकों के लिए एक मजबूत कानूनी सहायता नेटवर्क तैयार होगा।
यह न्याय तक पहुंच की पहल एक कानूनी रूप से जागरूक और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
यह पहल ज्यूडिशियल काउंसिल की उस व्यापक दृष्टि की पुनः पुष्टि करती है, जिसके अंतर्गत कानून का शासन, संवैधानिक मूल्यों का संरक्षण, विधिक सशक्तिकरण, भ्रष्टाचार के विरुद्ध सतर्कता और सभी के लिए समान न्याय तक पहुंच को बढ़ावा देना शामिल है।





