TV20 NEWS ||AZAMGARH :सर्पदंश का इलाज अस्पताल में, झाड़-फूंक में नहीं: सीएमओ

आजमगढ़ 17 जून 2026

बरसात में बढ़ता है खतरा, समय पर उपचार से बच सकती है जान
बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने और सर्पदंश होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एन.आर. वर्मा ने कहा कि आज भी कई लोग सांप काटने के बाद अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र का सहारा लेते हैं, जिससे उपचार में देरी होती है और कई बार मरीज की जान तक चली जाती है।
सीएमओ ने कहा कि सर्पदंश एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है और इसका प्रभावी उपचार केवल अस्पताल में ही संभव है। उन्होंने बताया कि सांप काटने के बाद झाड़-फूंक, चीरा लगाना, जहर चूसने का प्रयास करना अथवा अन्य पारंपरिक उपाय न केवल बेअसर हैं, बल्कि मरीज की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं।
डॉ. वर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्पदंश से संबंधित पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कराया जा रहा है। प्रारंभिक समीक्षा से पता चला है कि सर्पदंश की अधिकांश घटनाएं और मौतें जून से सितंबर के बीच होती हैं। बरसात के दौरान खेतों, झाड़ियों, जलभराव वाले स्थानों तथा रात के समय खुले क्षेत्रों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि जिले के सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश के उपचार के लिए आवश्यक विषरोधी औषधि (एंटी स्नेक वेनम) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को भी ऐसे मामलों में त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसलिए सर्पदंश होने पर बिना समय गंवाए निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचना चाहिए।
सीएमओ ने कहा कि सांप काटने की स्थिति में मरीज को घबराने न दें, उसे शांत रखें तथा प्रभावित अंग को अधिक हिलाने-डुलाने से बचाएं। जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचेगा, उसके स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि सर्पदंश जैसी गंभीर स्थिति में अंधविश्वास के बजाय वैज्ञानिक सोच अपनाएं और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। “सर्पदंश का इलाज अस्पताल में है, झाड़-फूंक में नहीं”, यही संदेश स्वास्थ्य विभाग गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।