*TV 20 NEWS || PRYAGRAJ: RTI का जवाब न देने पर Public Information Officer माध्यमिक शिक्षा बोर्ड तलब, सुनवाई 13 को, कोर्ट ने पूछा इस साल कितनी अर्जी आई व कितने का किया निस्तारण*

RTI का जवाब न देने पर Public Information Officer माध्यमिक शिक्षा बोर्ड तलब, सुनवाई 13 को, कोर्ट ने पूछा इस साल कितनी अर्जी आई व कितने का किया निस्तारण

RTI का जवाब न देने पर Public Information Officer माध्यमिक शिक्षा बोर्ड तलब, सुनवाई 13 को, कोर्ट ने पूछा इस साल कितनी अर्जी आई व कितने का किया निस्तारण

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद  में RTI आवेदन पर समय से सूचना उपलब्ध न कराने पर कड़ा रुख अपनाया है और जनसूचना अधिकारी क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी को हाजिर होने का निर्देश दिया और पूछा कि 2026 में RTI के तहत कितनी अर्जी आई,और कितने का निस्तारण किया गया और कितनी विचाराधीन है, कोर्ट ने पूरी जानकारी मांगी है. जस्टिस विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने छात्रा रागिनी सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.

याची का कहना था कि उसने उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित सूचना प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत आवेदन किया था, लेकिन अब तक कोई उत्तर नहीं दिया गया. याची की ओर से अधिवक्ता अजीत सिंह और हिमांशु सिंह ने न्यायालय के समक्ष प्रभावी बहस की. न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त 2026 को निर्धारित की है.

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नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत मंजूर, एसएसपी सहारनपुर को विवेचना में लापरवाही की जांच के आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने सहारनपुर के जनकपुरी थाने में दर्ज आपराधिक केस में आरोपी अमित को जमानत दे दी है. आरोपी 19 अप्रैल 2026 से जेल में बंद था. सह-आरोपी नीरज ने पीड़िता को रिश्ते में फंसाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और अपने दोस्त के साथ भी संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया. पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि वह सह-आरोपी नीरज के साथ रिश्ते में थी और आरोपी अमित ने नीरज के कहने पर उसे मोबाइल फोन दिया था, जिससे वह नीरज से बात करती थी.

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इसमें अमित के खिलाफ कोई आरोप नहीं था. हालांकि बाद में परिजनों के कहने पर धारा 183 बीएनएसएस के तहत दर्ज बयान में पीड़िता ने कहानी बदलते हुए आरोपी अमित पर भी अश्लील वीडियो के आधार पर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया. बचाव पक्ष और सरकारी वकील दोनों इस बात से इन्कार नहीं कर सके कि पुलिस को कथित अश्लील वीडियो बरामद नहीं हुआ.

कोर्ट ने पीड़िता के दोनों परस्पर विरोधी बयानों, वीडियो की गैर-बरामदगी, जेलों में भीड़भाड़, तथा सुप्रीम कोर्ट के कपिल वाधवान बनाम सीबीआई (2025) एवं हाईकोर्ट के माया तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2024) के फैसलों का हवाला देते हुए, बिना मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए, आरोपी को सशर्त जमानत देना उचित पाया.

कोर्ट ने पाया कि विवेचक ने न तो आरोपी का मोबाइल फोन जब्त किया और न ही एफएसएल जांच के लिए भेजा, जो जांच में गंभीर लापरवाही दर्शाता है. इस पर एसएसपी सहारनपुर को संबंधित विवेचक के खिलाफ जांच कर उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है.