*TV 20 NEWS || AZAMGARH :रक्तदान कर राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने मनाया अपना स्थापना दिवस; “जनसेवा और इंसाफ हेतु संघर्ष ही पार्टी की स्थापना का मकसद है: मौलाना आमिर रशादी; “वोट देगा अल्पसंख्यक (VDA) और राजयसभा जायेंगे चाचा और सेठ जी?*
आजमगढ़। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने रविवार 4 अक्टूबर को अपना स्थापना दिवस मानव सेवा और जनसंघर्ष को समर्पित करते हुए मनाया। स्थापना दिवस के अवसर पर पार्टी की ओर से रशाद नगर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में आम लोगों ने भी रक्तदान किया। शिविर का उद्घाटन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी किया। इस अवसर पर मौलाना रशादी ने कहा “राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल का उदय ही मानवसेवा और जनसेवा के लिए हुआ है और यही हमारा मूल उद्देश्य है। इसी उद्देश्य के तहत कौंसिल देश और प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर स्थापना दिवस को किसी न किसी जनहित के कार्य के माध्यम से मना रही है, ताकि इंसानियत और समाज को वास्तविक लाभ पहुंच सके। कौंसिल के कार्यकर्ता स्थापना दिवस के अवसर पर देशभर में रक्तदान, पर्यावरण जागरूकता, गरीबों में वस्त्र वितरण, मरीजों में फल वितरण, बाढ़ पीड़ितों की सहायता तथा मेडिकल कैंप व सामाजिक एवं जागरूकता अभियानों में हिस्सा ले रहे हैं।
मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि आज मुसलमानो को राजनैतिक तौर पर अछूत बना दिया गया है, सरकार और विपक्ष दोनों के लिए मुस्लमान बलि का बकरा हैं और अपनी आवश्यकता अनुसार राजनैतिक लाभ के लिए उसकी बलि दी जा रही है। आज मुसलमानो कि राजनैतिक पहचान तो छोड़िये उनकी निजी पहचान तक पर खतरा मंडरा रहा है, उनके घर, दुकाने, मस्जिद, मदरसे, दाढ़ी, टोपी तक पर हमला हो रहा है और मुसलमानो कि रहनुमाई करने का दम्भ भरने वाले कांग्रेस, सपा और अन्य तथाकथित सेकुलर दल खामोश है। खास तौर से उत्तर प्रदेश के मुसलमानो को समाजवादी पार्टी ने अपना वोट बैंक बताकर और बनाकर आज भाजपा सरकार में बलि का बकरा बना दिया है और मुसलमानो को कथित तौर पर सपा का वोट बैंक होने के नाते ही आज भाजपा सरकार में हर तरह का जुल्म सहना पड़ रहा है और समाजवादी पार्टी, उसके मुखिया श्री अखिलेश यादव, और यहाँ तक कि उनके तमाम मुस्लिम विधायक व सांसद को भी खामोश रहने के लिए मजबूर कर दिया गया है बल्कि ये दल इस इंतजार में बैठे हैं कि कब चुनाव आये और फिर वो भाजपा का डर दिखा मुसलमानो का वोट फिर मांग सके। आज जब मुसलमानो को सपा और कांग्रेस और बसपा के साथ कि जरूरत है तो इनके साथ खड़े होना तो दूर मुसलमानो का नाम तक ये दाल अपनी जबान से नहीं ले रहे है। ऐसे में आज मुस्लमान को समझना चाहिए और वो समझ भी रहा है कि अब अपने हक और वजूद कि लड़ाई उसे खुद लड़नी होगी और लड़ भी रहा है और ब्।। छत्ब् व अन्य आंदोलन में हमने इसकी झलक देखी है। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल लगातार इसके लिए संघर्ष कर रही है और वो आगे भी समाज को जागरूक कर आने वाले विधानसभा २०२७ के चुनावों में मजबूती से हिस्सा लेगी। अब ये इन सेकुलर दलों को तय करने का है कि वो मुसलमानो को भागीदारी देकर उनका प्रतिनिधित्व देंगे या सिर्फ सियासी गुलामी कराएँग। हम भी चाहते हैं कि प्रदेश से भाजपा का कुशासन समापत हो लेकिन इसके लिए मुस्लमान सिर्फ गुलाम बना रहे इन दलों का ये अब ये नहीं होगा।
समाजवादी पार्टी के हालिया राज्यसभा प्रत्याषी चयन पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का ये कैसा समाजवाद है जो पूंजीवाद के हाथ बिक गया है? मुसलमानो के वोट से जीते हुए विधायकों के द्वारा बनाये गए राजयसभा सांसद राजयसभा में मुसलमानो के विरुद्ध बनने वाले कानून पर वोट करेंगे, क्या समाजवादी पार्टी आजम खान की बहु को राजयसभा नहीं भेज सकती थी? क्या सपा को समर्थन करने वाले जेल में कैद मौलाना तौकीर रजा के परिवार से किसी को राजयसभा नहीं भेजा जा सकता था ? क्या किसी पसमांदा मुस्लमान को राजयसभा नहीं भेजा जा सकता था ? पिता भाजपा का राजयसभा सदस्य और बेटा सपा का राजयसभा सदस्य ये रिश्ता क्या कहलाता है ? और फिर कैसे ये लोग भाजपा की ‘‘बी‘‘ टीम मुस्लिम लीडरषिप वाली पार्टीयों को कहती है?ं
इस अवसर प पर पार्टी के तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे जिसमे मु,य प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह, महा सचिव तल्हा रशादी, यूथ विंग प्रदेष अध्यक्ष नुरुल हुदा, जिलाध्यक्ष मोतीउल्लाह शेख, अबसार शेख, आसिफ कुरैशी, मेराज खान, मनीराम गौतम, जैश अंसारी, इनामुल्लाह षेख, घन्षयाम कन्नोजिया, अजीम, षहाब आलम, मो0 फैसलख् खालिद फलाही, मास्टर तारिक आदि।
जारीकर्ता
मो० नसीम
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