*TV20 NEWS|| LUCKNOW :UP में टल सकता है त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव…आरक्षण के आंकड़ों में यह है उलझन!*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तय समय पर हो पाएंगे या नहीं, इस पर असमंजस की स्थिति बन गई है। चुनाव से पहले आरक्षण की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण पंचायत चुनाव टलने की संभावना जताई जा रही है। खास तौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर आयोग के गठन में देरी सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आई है।

 

 

पंचायतीराज विभाग ने ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए छह सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन अब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। आयोग की रिपोर्ट के बिना आरक्षण अधिसूचना जारी नहीं की जा सकती, ऐसे में चुनावी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
आरक्षण के आंकड़ों पर उलझन
जनगणना 2011 के अनुसार प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी 20.6982 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की आबादी 0.5677 प्रतिशत है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन्हीं अनुपातों के अनुसार सीटें आरक्षित की जानी हैं। हालांकि, जनगणना में ओबीसी आबादी के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। वर्ष 2015 में कराए गए रैपिड सर्वे के अनुसार प्रदेश की ग्रामीण आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 53.33 प्रतिशत बताई गई थी, जिसके आधार पर 2021 के पंचायत चुनाव में आरक्षण तय किया गया था।
नियमों के तहत किसी भी ब्लॉक में ओबीसी की आबादी 27 प्रतिशत से अधिक होने पर भी ग्राम प्रधान के पदों पर आरक्षण 27 प्रतिशत से अधिक नहीं दिया जा सकता। प्रदेश स्तर पर भी ओबीसी आरक्षण की अधिकतम सीमा 27 प्रतिशत निर्धारित है।
नगर निकाय जैसा ही रास्ता

 

 

नगर निकाय चुनाव के दौरान ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद सामने आया था, जिसके बाद सरकार ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर सर्वे कराया था। उसी तर्ज पर अब पंचायत चुनाव के लिए भी राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा जिलों में सर्वे कराया जाएगा। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होगी।
मंत्री का दावा, समय पर होंगे चुनाव
पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने चुनाव समय पर होने का दावा दोहराया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अप्रैल–मई में ही कराए जाएंगे। आयोग के गठन में हो रही देरी पर उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। उनका दावा है कि आयोग के गठन के बाद दो माह के भीतर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
बढ़ी सियासी हलचल
आरक्षण और आयोग गठन में देरी को लेकर सियासी गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। यदि आयोग का गठन जल्द नहीं हुआ, तो पंचायत चुनावों की समय-सारिणी पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।