*TV20 NEWS || AZAMGARH :फर्जी बीएड डिग्री व एसटी प्रमाण पत्र मामले में बड़ा खुलासा, दो सहायक अध्यापकों पर एफआईआर की मांग*
फर्जी बीएड डिग्री व एसटी प्रमाण पत्र मामले में बड़ा खुलासा, दो सहायक अध्यापकों पर एफआईआर की मांग
आजमगढ़।
बेसिक शिक्षा विभाग आजमगढ़ में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत अशोक कुमार गौड़ एवं उनकी पत्नी रीता गौड़ पर फर्जी बीएड डिग्री तथा अनुसूचित जनजाति (गोड) प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगा है। इस संबंध में प्रार्थी द्वारा जिलाधिकारी एवं मंडलायुक्त आजमगढ़ को पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज कराकर निष्पक्ष विवेचना कराए जाने की मांग की गई है।
प्रार्थी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार अशोक कुमार गौड़ पुत्र केदारनाथ एवं श्रीमती रीता गौड़ पत्नी अशोक कुमार, निवासी मोहल्ला अनन्तपुरा (कटरा), थाना कोतवाली, आजमगढ़ द्वारा बीए, बीएड एवं एसटी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की गई। शिकायत के बाद जिलाधिकारी व मंडलायुक्त के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ द्वारा शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच हेतु दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर तथा जाति प्रमाण पत्र की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया।
इसी क्रम में प्रार्थी द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत स्वामी देवानन्द पीजी कॉलेज, मठलार देवरिया एवं दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर से श्रीमती रीता गौड़ की बीएड डिग्री से संबंधित सूचना मांगी गई।
प्रार्थी का आरोप है कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय द्वारा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ को भेजी गई सत्यापन आख्या तथा आरटीआई के तहत प्रार्थी को दी गई सूचना में गंभीर विरोधाभास पाया गया है। इससे प्रथम दृष्टया प्रमाण पत्रों के फर्जी एवं कूटरचित होने की आशंका प्रबल होती है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ की अनुचित संलिप्तता के चलते दोनों सहायक अध्यापकों को संरक्षण दिया जा रहा है। प्रार्थी के अनुसार—
11 अप्रैल 2025 एवं 21 जुलाई 2025 को विश्वविद्यालय द्वारा भेजी गई सत्यापन आख्या में लेटर पैड, डिस्पैच संख्या, हस्ताक्षर एवं पत्र संख्या में भिन्नता पाई गई।
सत्यापन प्रपत्र अशोक कुमार द्वारा स्वयं लिखे जाने का आरोप लगाया गया है।
आरटीआई के तहत प्राप्त सूचना के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा सत्यापन शुल्क न तो जमा कराया गया और न ही सत्यापन प्रपत्र पर इसका कोई उल्लेख है।
प्रार्थी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने तथा विभागीय व कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में क्या कदम उठाता है।





