*TV 20 NEWS || AZAMGARH : उ.प्र.स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 एंव उप्र स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) (संशोधन) अधिनियम, 2020 के प्रभावी कियान्वयन लागू
आजमगढ़ 02 अप्रैल 2026/
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार के निर्देश के क्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि अपर मुख्य उत्तर प्रदेश शासन माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-7 लखनऊ 25 मार्च 2026 द्वारा उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 एंव उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) (संशोधन) अधिनियम, 2020 के प्रभावी कियान्वयन लागू करने का निर्देश दिया गया है। उक्त के कम में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा परिषद, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सी०बी०एस०ई०) और आई० जी०सी०एस०ई० या सरकार द्वारा समय समय पर परिभाषित किन्ही अन्य परिषदों द्वारा मान्यता / सम्बद्धता प्राप्त ऐसे समस्त स्ववित्तपोषित पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट कालेज के प्रवन्धक / प्रधानाचार्य को निर्देशित किया जाता है कि –
प्रत्येक विद्यालय शैक्षणिक वर्ष प्रवेश प्रारम्भ होने के 60 दिन पूर्व अपनी वेवसाइट पर शुल्क का विवरण अपलोड करेगा एंव सूचना पट्ट पर प्रकाशित भी करेगा ।शुल्क का विवरण प्रकाशित किये जाने के समय उक्त विद्यालय यह भी विनिर्दिष्ट करेगा कि संदाय मासिक या त्रैमासिक या अर्द्धवार्षिक किस्तों में किया जायेगा। परन्तु कोई विद्यालय यह एक मात्र व्यवस्था नहीं करेगा कि शुल्क का संदाय वार्षिक आधार पर किया जाय।
कोई विद्यालय समुचित प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के सिवाय, शैक्षणिक सत्र के दौरान समुचित प्राधिकारी के लिए संसूचित शुल्क से अधिक कोई शुल्क प्रभारित नहीं करेगा। छात्र से से उद्ग्रहीत प्रत्येक शुल्क या प्रभार के लिए रसीद जारी की जायेगी। किसी छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे व यूनिफार्म आदि किसी विशिष्ट दुकान से कय करने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा।
विद्यालय द्वारा 05 निरन्तर शैक्षणिक वर्षों के भीतर विद्यालय पोशाक में परिवर्तन नहीं किया जायेगा, यदि परिवर्तन अपेक्षित हो तो इसमें परिवर्तन जनपदीय शुल्क नियामक समिति के पूर्व अनुमोदन के पश्चात ही किया जायेगा। अनुज्ञात शुल्क वृद्धि से अधिक, वृद्धि करने का प्रस्ताव करने वाला प्रत्येक मान्यता प्राप्त विद्यालय शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ होने के कम से कम 03 माह पूर्व समुचित दस्तावेजों के साथ प्रस्तावित शुल्क विवरण से समाविष्ट प्रस्ताव ऐसी वृद्धि की आवश्यकता को न्यायसंगत सिद्ध करते हुए जिला शुल्क नियामक समिति को प्रस्तुत करेगा। उक्त के कम में शुल्क वृद्धि से सम्बन्धित जिला शुल्क नियामक समिति द्वारा पारित आदेश मान्यता प्राप्त विद्यालय पर बाध्यकारी होगा। अधिनियम के उपबन्धों का प्रथम बार उल्लघंन किये जाने की स्थिति में छात्र से अधिसूचित शुल्क से अधिक उग्रहित शुल्क वापस करने के साथ-साथ पाँच लाख रूपये तक का अर्थ दण्ड अधिरोपित कर सकती है।
अधिनियम के उपबन्धों का द्वितीय बार उल्लघंन किये जाने की स्थिति में छात्र से अधिसूचित शुल्क से अधिक उद्ग्रहित शुल्क वापस करने के साथ-साथ एक लाख रूपये तक का अर्थ दण्ड अधिरोपित कर सकती है।





