*TV 20 NEWS || AZAMGARH : नव जागृति सेवा संस्थान की शिकायत पर खुला बड़ा मामला, ट्रांसफर के बाद भी आजमगढ़ में जमे अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग पर संगठित भ्रष्टाचार के आरोप*

आजमगढ़। जनपद के स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त संगठित भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच नव जागृति सेवा संस्थान, आजमगढ़ की शिकायत पर एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संस्थान द्वारा की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य विभाग में फर्जी पंजीकरण, भ्रामक जांच आख्या, बिना समिति अनुमोदन के नवीनीकरण तथा निरीक्षण रिपोर्ट में हेरफेर जैसे गंभीर अनियमितताएं लंबे समय से चल रही हैं। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) द्वारा की गई जांच में भी इन अनियमितताओं के स्पष्ट संकेत मिल चुके हैं, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
इसी क्रम में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है कि संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण दिनांक 06 मार्च 2026 को बलिया के लिए कर दिया गया था। साथ ही, दिनांक 08 अप्रैल 2026 को अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आजमगढ़ मंडल द्वारा जारी पत्र में भी उनका कार्यस्थल बलिया ही अंकित है। इसके बावजूद अधिकारी का आजमगढ़ में ही बने रहना शासन की मंशा एवं स्थानांतरण नीति पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।
संस्थान का आरोप है कि विभागीय स्तर पर जानबूझकर कार्रवाई को टालते हुए दोषी अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। ट्रांसफर के बाद भी अधिकारी का जनपद में बने रहना इसी संरक्षण का प्रमाण बताया जा रहा है।
पूरा मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 420, 409, 468, 471 एवं 120-B तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
नव जागृति सेवा संस्थान ने मांग की है कि स्थानांतरण आदेश का तत्काल पालन कराया जाए, संबंधित अधिकारी को जनपद से हटाया जाए, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच SIT, Vigilance या CB-CID से कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
संस्थान ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था पर से आम जनता का विश्वास समाप्त हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासनिक तंत्र की होगी।