*TV 20 NEWS || AZAMGARH : राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस पर याद किये गये सांख्यिकीविद् महालनोबिस,सटीक आंकड़ों के माध्यम से विकास योजनाओं की मजबूत नींव का निर्माण*
प्रेस नोट
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस पर याद किये गये सांख्यिकीविद् महालनोबिस
सटीक आंकड़ों के माध्यम से विकास योजनाओं की मजबूत नींव का निर्माण
आजमगढ़ 29 जून — प्रख्यात सांख्यिकीविद् प्रो. प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के अवसर पर सोमवार को उप निदेशक अर्थ एवं संख्या कार्यालय में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया। उप निदेशक, अर्थ एवं संख्या हेमन्त कुमार ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय संख्यिकी दिवस का उद्देश्य सांख्यिकी के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विकास योजनाओं के निर्माण में विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका को रेखांकित करना है। प्रशासनिक स्तर पर भी विभिन्न विभागों में आंकड़ों को गुणवत्ता और साक्ष्य आधारित योजना निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उप निदेशक, अर्थ एवं संख्या हेमन्त कुमार ने यह भी कहा कि दरअसल विकास योजनाओं में सांख्यिकीय आंकड़ों की भी अहम भूमिका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, पोषण, पेयजल, सड़क, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं की रूपरेखा जनसंख्या एवं अन्य आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकारी विभाग नियमित रूप से आंकड़ों का संकलन कर उन्हें राज्य और केंद्र सरकार को उपलब्ध कराते हैं ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंच सके। जिलों की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए अधिकांश विकास योजनाएं ग्रामीण आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर संचालित की जाती हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बदलते समय में डिजिटल तकनीक के उपयोग से आंकड़ों का संकलन अधिक पारदर्शी और सटीक हुआ है। विभिन्न विभाग अब आनलाइन पोर्टलों और मोबाइल एप के माध्यम से सूचनाएं एकत्र कर रहे हैं। इससे योजनाओं की निगरानी आसान हुई है और लाभार्थियों का सत्यापन भी अधिक प्रभावी ढंग से संभव हो रहा है।
अर्थ एवं संख्याधिकारी डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिको दिवस प्रत्येक वर्ष 29 जून को मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय और अद्यतन आंकड़े ही प्रभावी नीति निर्माण की आधारशिला हैं। सही आंकड़ों के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग विकास कार्यों को प्राथमिकता तय करना तथा योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन संभव हो पाता है। उन्होंने भी कहा कि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली जनगणना और विभिन्न सर्वेक्षणों से प्राप्त आंकड़े जिलों की बदलती सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को सामने लाएंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य की विकास योजनाओं अधिक प्रभावी, समावेशों जनहितकारी बनाया जा सकेगा। इससे पूर्व दोनों अधिकारियों के साथ ही कार्यालय के प्रवीण कुमार, सूर्यभान, राजकुमार, राजेश कुमार, प्रेमचन्द आदि ने सांख्यिकीविद् प्रो. प्रशांत चंद्र महालनोबिस के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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