*TV 20 NEWS || AZAMGARH : 14 अगस्त ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ पर प्रदर्शनी, लघु फिल्म प्रसारण, संगोष्ठी एवं मौन सभा का हुआ आयोजन*

14 अगस्त ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ पर प्रदर्शनी, लघु फिल्म प्रसारण, संगोष्ठी एवं मौन सभा का हुआ आयोजन

देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नही जा सकता है- दारा सिंह चौहान

जहॉ सह अस्तित्व जीवन का एक तरीका था, विभाजन विभीषिका ने सब उजाड़ दिया-मा0 कारागार मंत्री

देश के बंटवारे में विस्थापितों के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस- जिलाधिकारी

विभाजन विभीषिका से प्रभावित विस्थापितों, परिजनों ने सुनाया वृतांत एवं उनको अंगवस्त्रम, मोमेण्टो व पुस्तक भेंटकर किया गया सम्मानित

भारत का विभाजन अभूतपूर्व मानव विस्थापन और मजबूरी में पलायन की दर्दनाक कहानी है-सीडीओ

‘‘छुक-छुक करते पीछे छुट गई परम्पराएॅ, विरासत, अधिकार और रिश्तेदारी’’-डीआईओ डॉ0 पंकज कुमार

आजमगढ़ 14 अगस्त, 2026/

हर घर तिरंगा कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वाधीनता दिवस के पूर्व दिवस 14 अगस्त को ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ पर हरिऔध कला केन्द्र में‘‘ अभिलेख/चित्र प्रदर्शनी एवं संगोष्ठी’’ का शुभारम्भ मा0 कारागार मंत्री, दारा सिंह चौहान, जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल द्वारा किया गया। डाक्यूमेंटरी मूवी के माध्यम से विभाजन की मानवीय त्रासदी का प्रसारण किया गया। विस्थापित परिवार के सदस्यों द्वारा अनुभव व वृतांत को सुना गया एवं उनके साथ त्रासदी के दौरान प्रार्णाेत्सर्ग करने वाले लोगों की याद में 02 मिनट की मौन श्रद्धाजलि दी गयी।

विभाजन विभीषिका दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में मा0 मंत्री दारा सिंह चौहान ने मा0 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का संदेश पढ़कर सुनाते हुए बताया कि ‘‘देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाईयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष एवं बलिदान के याद में 14 अगस्त को ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ के तौर पर मनाया जा रहा है। विभाजन विभीषिका इतनी भयावह थी और इतने लंबे काल तक चली कि दशकों बाद तक लोग पाकिस्तान और बाग्लादेश से बड़ी संख्या में पलायन करते रहे। इस समय बंगाल का भी विभाजन हुआ। इसमें बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया था जो सन् 1971 में बंाग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। मजहब के नाम पर हुआ देश बटवारा विभाजन की विभीषिका ने करोड़ों को उजाड़ा। उन्होंने कहा कि शरणार्थी बनने को मजबूर हुए करोड़ों लोग अपने घर-बार को छोड़कर पैदल ही चल दिए। गांव के गों उजड़ते गए, वे काफिलों में बदलते गये और यह काफिला मीलों तक पसरा रहा।

जिलाधिकारी ने ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत का विभाजन अभूतपूर्व मानव विस्थापन और मजबूरी में पलायन की दर्दनाक कहानी है। यह एक ऐसी कहानी है जिसमें लाखों लोग अजनबियों के बीच एकदम वितरित वातावरण में नया आशियाना तालाश रहे थे। विश्वास व धार्मिक आधार पर एक हिंसक विभाजन की कहानी होने के अतिरिक्त यह एक बात की भी कहानी है, कैसे एक जीवन शैली एक वर्षाे पुराने सह-अस्तिव का युग अचानक और नाटकी रूप से समाप्त हो गया। लगभग 60 लाख गैर मुस्लमान उस क्षेत्र से निकल आए, जो बाद में पश्चिमी पाकिस्तान बन गया। 65 लाख मुसलमान पंजाब, दिल्ली, आदि के भारतीय हिस्सों से पश्चिमी पाकिस्तान चके गये थे। 20 लाख गैर मुसलमान पूर्वी बंगाल, जो बाद में पूर्वी पाकिस्तान बना, से निकल कर पश्चिम बंगाल आए, 1950 में 20 लाख और गैर मुस्लमान पश्चिम बंगाल आए। 10 लाख मुसलमान पश्चिम बंगाल से पूर्वी पाकिस्तान चले गये। इस विभीषिका में मारे गये लोगों का आकड़ा 5 लाख बताया जाता है।

मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल ने बताया कि यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी विभिषिका थी। विश्व की किसी भी त्रासदी में इतनी बड़ी संख्या में न तो लोगों ने अपनी प्राण गवाये, न ही अपने घरो से उजाड़े गये। भारत के लाखों लोगों ने बलिदान देकर आजादी प्राप्त की थी। ऐसे समय पर देश का दो टुकड़ों में बट जाने का दर्द लाखों परिवारों में एक गहरे जख्म की तरह घर कर गया था।

जिला सूचना अधिकारी डॉ0 पंकज कुमार ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के उपादेयता व प्रासंगिकता पर बल देते हुए बताया कि अपनी मातृभूमि के उन परिवारों को नमन करते हुए जिन्हें भारत के विभाजन के दौर में अपने परिवार जन के प्राण न्यौछावर करने पड़े ऐसे लोगों के सघर्ष एवं बलिदान की याद में यह दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि 20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंटएटली ने लंदन के हाउस ऑफ कॉमंस में घोषणा कर दी की 30 जून 1948 तक भारत को सत्ता का हस्तान्तरण कर दिया जायेगा। जिसके क्रम में वायसराय लार्ड माउण्ट वेटन ने 31 मई 1947 को लंदन से दिल्ली आया। 02 जून 1947 को विभाजन विषयक ऐतिहासिक बैठक में 14/15 अगस्त को पाकिस्तान एवं भारत को आजाद एवं 04 जून को पत्रकार सम्मेलन में जनसंख्या के स्थानान्तरण पर बल दिया। 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद ने भारत का स्वतंत्रता अधिनियम पारित हुआ। उन्होंने अपने सम्बोधन में ’‘कभी यहॉ बाजार आबाद हुआ करते थे, आज खंडहर पनाह भी नहीं दे पा रहे’’ के माध्यम से विस्थापन की दर्दनाक कहानी बया की। रावलपिंडी, कराची, लाहौर, आदि पाकिस्तान के शहरों से टेªनों में भरकर आने वाले गैर मुस्लमानों कि यात्रा वितांत का उल्लेख इन पक्तियों में किया-‘‘छुक-छुक करते पीछे छुट गई परम्पराएॅ, विरासत, अधिकार और रिश्तेदारी’’।

विभाजन विभीषिका से प्रभावित विस्थापित- 96 वर्षीय श्रीमती सुदर्शन कौर चावला, संगम अरोड़, सरदार परमजीत को मा0 मंत्री व जिलाधिकारी द्वारा अंग वस्त्रम, मोमेण्टो, बुके व पुस्तक भेंटकर सम्मानित किया गया और उनके परिजनों द्वारा दी गयी सहादत व त्याग को नमन किया गया।

96 वर्षीय श्रीमती सुदर्शन कौर चावला ने उस दौर को याद करते हुए सिहरन भरी आवाज में भावुक होकर बताया कि कैसे उस समय उनके पिता व गर्भवती अवस्था मंे मॉ ने पाकिस्तान से ट्रेन के माध्यम से आगरा गुरूद्वारा मंे आकर शरण लिया। आगे का कुछ नही पता था कि जीवन अब नये सिरे से कैसे शुरू किया जाए। बताया कि जिन्होने विभाजन का दर्द झेला है, वही समझ सकते हैं, उसे शब्दों में कहा बड़ा मुश्किल है।

विभीषिका पीड़ित परिवार के सदस्य संगम अरोड़ा ने बताया कि समय समय पर पिताजी द्वारा सुनाये गये किस्से कहानियां व वृतांत के माध्यम से विभाजन के दर्द को मैने सुना है। जब वे बताते थे, तो उनकी आंखों में आंसू आ जाते थे। सरदार परमजीत भी अपने पिता, दादा से सुने उन यादों को रेखांकित किया।

अपर जिलाधिकारी प्रशासन संजय चावला ने भी विभाजन का मानव विस्थापन व जबरन पलायन की उन कहानियों को रेखांकित किया, जिनको वे अपने माता-पिता, दादा-दादी से सुनते थे। बताया कि कैसे पूरी जीवनशैली, संस्कृति, रहन-सहन, सब कुछ अचानक पिछे छूट गया। उन्होने एक पंक्ति के माध्यम से त्रासदी को रेखांकित किया। ‘‘सीमा के उस पार बनायें एक नया संसार, चलो एक नई शुरूआत करते हैं। ’’ उन्होने ने बताया कि विभाजन ब्रिटिश योजना खतरनाक सिद्धान्त थी। जहॉ एक व्यक्ति धर्म के साथ अपनी राष्ट्रीयता बदलता है।

मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए संगोष्ठी में बताया कि विभाजन विभीषिक स्मृति दिवस हमें न सिर्फ भेदभाव, वैमनस्य एवं दुर्भावना को खत्म करने का याद दिलायेगा। इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानव सशक्तिकरण की प्रेरणा मिलेगी।

उपरोक्त मार्मिक दास्तां की कहानी को सूचना विभाग द्वारा आयोजित अभिलेख प्रदर्शनी में जीवंत किया गया, तथा मा0 कारागार मंत्री के नेतृत्व में अधिकारियों से लेकर छात्र/छात्राओं जनमानस द्वारा मौन श्रद्धाजलि के रूप में व्यक्त किया गया। अभिलेख प्रदर्शनी से आम जनमानस विभाजन की विभीषिका के विविध आयाम और जानकारियों से रूबरू हुए। प्रदर्शनी में विभाजन से सम्बन्धित विविध बैठकें, कान्फ्रेस जनसभा आम लोगो की जीवन की विपदा आदि प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा। ताकि आमजन मानस भी विभाजन की त्रासदी को समझते हुए देश की प्रगति में योगदान सुनिश्चित कर सकें।

कार्यक्रम में चेयरमैन कोआपरेटिव बैंक लक्ष्मण मौर्य, समाजसेवी प्रवीण सिंह, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन, ज्वाइंट मजि0 सिद्धार्थ सिंह, जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 गम्भीर सिंह, मुख्य राजस्व अधिकारी संजीव ओझा, डीसी एनआरएलएम डॉ0 अराधना त्रिपाठी, डीआईओएस अजय कुमार, जिला पर्यटन अधिकारी नवीन कुमार सहित बड़ी संख्या में जनमानस उपस्थित रहे।