TV20 NEWS ||AZAMGARH :लंपी रोग की रोकथाम को लेकर आजमगढ़ प्रशासन सतर्क, पशुओं की सुरक्षा में लापरवाही पर होगी कार्रवाई — जिलाधिकारी

आजमगढ़ 09 सितंबर 2026

जनपद में अब तक लंपी डर्मेटाइटिस रोग (Lumpy Skin Disease) का कोई मामला सामने नहीं आया है। पशुओं को इस रोग से सुरक्षित रखने तथा संक्रमण की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक सतर्कता बरती जा रही है। जिलाधिकारी आजमगढ़ ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को ग्राम स्तर तक प्रभावी निगरानी, जनजागरूकता एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और पशुओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी बीमार अथवा संदिग्ध पशु का परिवहन न किया जाए। रोग की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग द्वारा निरंतर निगरानी रखते हुए आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

संदिग्ध पशुओं की तत्काल पहचान एवं पृथक्करण

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि जिन पशुओं में लंपी रोग के संभावित लक्षण दिखाई दें, उन्हें तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग किया जाए। साथ ही, संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना देकर आवश्यक चिकित्सकीय कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।

पशुपालकों को विशेष रूप से जागरूक किया जाए कि पशुओं के शरीर पर गांठें, बुखार, सुस्ती, त्वचा पर घाव अथवा अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर बीमारी को छिपाने के बजाय तत्काल पशु चिकित्सा विभाग को सूचित करें।

टीकाकरण एवं निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया है कि शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्र पशुओं के टीकाकरण की कार्रवाई प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जाए। संभावित संक्रमण वाले क्षेत्रों में सघन निगरानी एवं नियमित क्षेत्रीय निरीक्षण कराया जाए तथा संदिग्ध मामलों की तत्काल रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पशु चिकित्सा विभाग की टीमों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्र में तत्काल चिकित्सा एवं नियंत्रण दल भेजा जाए।

मक्खी-मच्छर एवं अन्य वाहकों की रोकथाम पर जोर

लंपी रोग के नियंत्रण के लिए पशुओं के आसपास स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। जिलाधिकारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के रहने के स्थानों की नियमित सफाई, कीट नियंत्रण तथा स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम प्रधानों एवं पंचायत स्तर के कार्मिकों से अपेक्षा की गई है कि वे पशुपालकों को बीमारी के लक्षणों एवं बचाव के उपायों के संबंध में जागरूक करें।

बीमार पशुओं को खुले में न छोड़ें और उनका परिवहन न करें

जिलाधिकारी ने पशुपालकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध अथवा बीमार पशु को खुले में न छोड़ें और उसे अन्य पशुओं के संपर्क में आने से रोकें। बीमार अथवा संदिग्ध पशुओं का किसी भी प्रकार का परिवहन न किया जाए। पशुओं की आवाजाही के दौरान भी विशेष सावधानी बरती जाए। मृत पशुओं के शव का सुरक्षित एवं निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया के अनुसार निस्तारण किया जाए, ताकि संक्रमण फैलने की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।

लापरवाही पर निर्धारित की जाएगी जवाबदेही

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रोग नियंत्रण एवं रोकथाम से संबंधित शासनादेशों एवं निर्देशों के अनुपालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी अथवा कर्मचारी की जवाबदेही निर्धारित की जाएगी।

संदिग्ध मामलों की समय से सूचना प्राप्त करने, क्षेत्रीय स्तर पर निरीक्षण करने तथा आवश्यक कार्रवाई की रिपोर्टिंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

पशुपालकों से जिलाधिकारी की अपील

जिलाधिकारी ने जनपद के सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें। बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सा विभाग को सूचित करें, बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और पशु चिकित्सक की सलाह के बिना कोई दवा न दें। उन्होंने कहा कि “समय पर सूचना, समय पर उपचार और सामूहिक सतर्कता ही लंपी रोग की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है।”

जिला प्रशासन एवं पशुपालन विभाग द्वारा जनपद की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जनपद में अब तक रोग का कोई मामला सामने नहीं आया है तथा बीमार एवं संदिग्ध पशुओं के परिवहन पर प्रतिबंध का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है।