स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा की दृश्यता एवं गरिमा बनाए रखने की मांग
आजमगढ़। दीवानी कचहरी, चर्च के सामने स्थित स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा को वर्तमान स्थिति की अपेक्षा अधिक ऊंचाई पर स्थापित कराने की मांग उठी है। नव जागृति सेवा संस्थान, आजमगढ़ ने इस संबंध में आयुक्त आजमगढ़ मंडल को प्रार्थना पत्र देकर स्थल का तकनीकी निरीक्षण कराने तथा प्रतिमा की दृश्यता और गरिमा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
संस्थान का कहना है कि वर्तमान में दो हाथों की बड़ी आकृति के पीछे अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर स्थित होने के कारण स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा सड़क और आसपास के क्षेत्र से स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती तथा आंशिक रूप से ढकी हुई प्रतीत होती है। जबकि उक्त तिराहा स्वामी विवेकानंद तिराहा तथा संबंधित मार्ग स्वामी विवेकानंद मार्ग के नाम से जाना जाता है।
संस्थान ने कहा कि विकास एवं सुंदरीकरण आवश्यक हैं, लेकिन इसके साथ महान पुरुषों की प्रतिमाओं की दृश्यता, गरिमा और सम्मान का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। संस्था ने मांग की है कि सक्षम तकनीकी अधिकारी द्वारा स्थल का निरीक्षण कर प्रतिमा की उचित ऊंचाई, चबूतरे एवं आधार की संरचनात्मक सुरक्षा, अनुपात तथा दृश्यता का परीक्षण कराया जाए।
नव जागृति सेवा संस्थान ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी विकास कार्य का विरोध करना नहीं, बल्कि विकास के साथ स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा की गरिमा एवं सम्मान सुनिश्चित करना है। संस्थान ने यह भी कहा कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, तकनीकी स्वीकृति एवं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रतिमा को उचित ऊंचाई पर स्थापित कराने में आने वाले आवश्यक व्यय का वहन संस्थान द्वारा किया जाएगा।
संस्थान ने आयुक्त से नगर पालिका परिषद, आजमगढ़ के अध्यक्ष/अधिशासी अधिकारी को आवश्यक कार्यवाही के लिए निर्देशित करने तथा अन्य आवश्यक अनुमति अथवा अनापत्ति की प्रक्रिया के संबंध में दिशा-निर्देश देने की मांग की है।
इस अवसर पर संस्थान की ओर से सत्य विजय राय एवं आशीष कुमार राय , रवि प्रताप सिंह, मयंक गुप्ता ने कहा कि यह पहल किसी व्यक्ति विशेष के सम्मान का विषय न होकर स्वामी विवेकानंद जी के विचारों, आदर्शों तथा राष्ट्र एवं मानवता के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने का सामाजिक प्रयास है।






