विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं, धर्म की विजय और अधर्म के अंत का पर्व
जय श्रीराम के जयघोष के साथ मनाएं विजयादशमी, प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने का लें संकल्प
विजयादशमी का पावन पर्व हमें सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का यह विशेष अवसर है।
प्रभु श्रीराम की स्तुति में कहा गया है—
“जय राम सदा सुखधाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।।
भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो।।”
इन पवित्र चौपाइयों के माध्यम से प्रभु श्रीराम की महिमा, उनके पराक्रम और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का स्मरण किया जाता है। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में सत्य, त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म का पालन करते हुए समाज के सामने आदर्श स्थापित किए।
विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने की स्मृति में मनाया जाता है। यह संदेश देता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। रावण दहन के माध्यम से समाज को अहंकार, क्रोध, लोभ, अन्याय और अधर्म जैसी बुराइयों को त्यागने का संदेश दिया जाता है।
यह पर्व हमें अपने भीतर की नकारात्मकता को समाप्त कर प्रेम, सद्भाव, करुणा और भाईचारे को बढ़ावा देने की प्रेरणा भी देता है। प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर ही एक बेहतर समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।
इस पावन अवसर पर सभी देशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। प्रभु श्रीराम सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली प्रदान करें तथा हर घर में प्रेम और सद्भाव का दीप जलाएं।
धर्म की विजय हो, अधर्म का नाश हो। प्रभु श्रीराम की कृपा सभी पर बनी रहे।
सियावर रामचंद्र की जय! जय श्रीराम!






