TV 20 NEWS || AZAMGARH : जनपद न्यायाधीश की अध्यक्षता में जनपद न्यायालय परिसर आजमगढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत का किया गया आयोजन

जनपद न्यायाधीश की अध्यक्षता में जनपद न्यायालय परिसर आजमगढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत का किया गया आयोजन

लोक अदालत में दिया गया फैसला अन्तिम, उसके खिलाफ किसी ऊपरी न्यायालय में अपील नहीं होती- जनपद न्यायाधीश

लोक अदालत में दिये गये फैसले सुलह-समझौते के आधार पर होते हैं, इसलिए पक्षकारों के बीच मतभेद भी हो जाते हैं समाप्त

आजमगढ़ 09 मई 2026/

मा० राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली व उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आजमगढ़ द्वारा मा० जनपद न्यायाधीश जय प्रकाश पाण्डेय की अध्यक्षता में जनपद न्यायालय परिसर आजमगढ़ में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें न्यायिक अधिकारीगण, बैंक पदाधिकारीगण, अधिवक्तागण, न्यायालय के कर्मचारीगण उपस्थित रहे। राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ मा० जनपद न्यायाधीश जय प्रकाश पाण्डेय द्वारा दीप प्रज्जवलित करके तथा वाग्देवी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया गया।

लोक अदालत के शुभारम्भ अवसर पर अहसानुल्लाह खान प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, मुकेश कुमार सिंह-प्रथम, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, अजय कुमार शाही अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कमला पति- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अजय श्रीवास्तव अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विजय कुमार वर्मा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ओम प्रकाश मिश्रा नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत, जैनुद्दीन अंसारी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, अमर सिंह 1 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफ०टी०सी० प्रथम, दिनेश कुमार-II अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफ०टी०सी० द्वितीय तथा अन्य सम्मानित न्यायिक अधिकारीगण, बार के अध्यक्ष तथा महामंत्री व बैंक के पदाधिकारीगण ने वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष पुष्पार्चन किया।

मा० जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत आम आदमी के लिए उपलब्ध एक महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है, जिसके माध्यम से विवाद का निपटारा निःशुल्क व त्वरित किया जाता है। लोक अदालत में दिया गया फैसला अन्तिम होता है, उसके खिलाफ किसी ऊपरी न्यायालय में अपील नहीं होती हैं। लोक अदालत में दिये गये फैसले सुलह-समझौते के आधार पर होते हैं, इसलिए पक्षकारों के बीच मतभेद भी समाप्त हो जाते है। इसमें न कोई जीतता है और न ही कोई हारता है।

लोक अदालत में निस्तारण हेतु कुल 136516 वाद चिन्हित किये गये थे, जिसमें कुल 116721 वाद निस्तारित हुए तथा रू0 275813675 धनराशि का समझौता हुआ। प्रीलिटिगेशन स्तर पर 101767 तथा कोर्ट से 14954 दीवानी व फौजदारी वाद, राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित हुए। मुकेश कुमार सिंह-प्रथम, मा० पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा कुल 135 वादों का, अजय कुमार शाही, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम न्यायालय द्वारा कुल 01 वाद का, कमला पति-1 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नं0-01 द्वारा 02 वादों का, विजय कुमार वर्मा, विशेष न्यायाधीश एस०सी०/एस०टी० एक्ट द्वारा कुल 10 वादों का, ओम प्रकाश मिश्रा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ई०सी० एक्ट द्वारा 806 वादों का निस्तारण किया गया। जैनुद्दीन अंसारी, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वारा 03 वादों का, दिनेश कुमार, अपर जिला एंव सत्र न्यायाधीश, एफ०टी०सी०-02 द्वारा 01 वादों का निस्तारण किया गया। सत्यवीर सिंह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 3780 वादों का निस्तारण किया गया। वहीं पारिवारिक न्यायालय से अहसानुल्लाह खान, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय द्वारा 69 वादों का, बालकृष्ण एन० रंजन, अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय संख्या-02 द्वारा 15 वादों का निस्तारण किया गया। इस प्रकार पारिवारिक न्यायालय द्वारा कुल 84 वादों का निस्तारण किया गया, जिनमें 19 दम्पत्तियों ने एक दूसरे को माला पहनाकर व मिठाई खिलाकर एक साथ जाने का निर्णय लिया।

इस लोक अदालत में जिला कारागार, आजमगढ़ में निरूद्ध बन्दियों द्वारा कौशल विकास के तहत बनाये गये सामानों का भी स्टॉल लगाया गया। लोक अदालत में एक जिला एक उत्पाद के तहत निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी, मुबारकपुर की रेशमी साड़ी का भी स्टॉल लगाया गया था। इस लोक अदालत में वादकारियों के लिए चिकित्सीय शिविर का भी स्टॉल लगाया गया। लोक अदालत में जनपद के विशेष व्यंजन के तहत लौंगलता व घाठी का भी स्टॉल लगाया गया।

कार्यक्रम का संचालन नितिका राजन सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आजमगढ़ द्वारा किया गया। इस प्रकार लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया।