*TV 20 NEWS || LUCKNOW:श्रावण माह लोकमंगल, श्रम-सम्मान और प्रकृति-सहअस्तित्व का पावन पर्व, भगवान शिव का त्याग, सेवा और समरसता का संदेश मानवता को जनकल्याण की राह दिखाता है*

मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,

श्रावण माह लोकमंगल, श्रम-सम्मान एवं सामूहिकता का पावन पर्व है। प्रकृति नवसृजन का संदेश देती है तथा अन्नदाता का परिश्रम हरित समृद्धि के रूप में फलीभूत होने लगता है। सनातन संस्कृति में प्रकृति का यही नवोन्मेष शिव-आराधना से जुड़कर जीवन को संयम, सेवा और समरसता का मार्ग दिखाता है।

समुद्र-मंथन के समय भगवान शिव द्वारा हलाहल का पान सृष्टि की रक्षा हेतु किए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है। उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा उसी त्याग, कृतज्ञता और जनकल्याण के भाव की अभिव्यक्ति है। देवाधिदेव महादेव स्वयं प्रकृति बोध के देवता हैं। उनकी जटाओं में प्रवाहित गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, कंठ का सर्प, नंदी जी और उनके गण, हमें प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का संदेश देते हैं।

—मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी

(योगी की पाती के प्रमुख अंश)