*TV 20 NEWS || AZAMGARH :अनाथ दोनों बच्चियों को SSP डा0 अनिल कुमार और आजमगढ़ पुलिस ने लिया गोद; पालन-पोषण एवं शिक्षा में माता-पिता की तरह निभाएगी भूमिका*
*प्रेस विज्ञप्ति, थाना अहरौला, आजमगढ़*
*अनाथ दोनों बच्चियों को SSP डा0 अनिल कुमार और आजमगढ़ पुलिस ने लिया गोद; पालन-पोषण एवं शिक्षा में माता-पिता की तरह निभाएगी भूमिका*
*दो मासूम बेटियों का सहारा बना पुलिस परिवार; एसएसपी आजमगढ़ डॉ0 अनिल कुमार देंगे एक माह का वेतन, समस्त पुलिसकर्मी देंगे एक दिन का वेतन*
*तीन बच्चों को कमरे में लेकर बंद था अरविंद, पुलिस एवं परिजन करीब 07 घंटे तक करते रहे बाहर आने की अपील*
*गोली चलने की आवाज सुनते ही एसएसपी समेत पुलिस टीम ने जान जोखिम में डालकर तोड़ा दरवाजा, दो बच्चियों को सुरक्षित निकाला*
*एडीजी वाराणसी जोन श्री नवीन अरोड़ा ने घटनास्थल पर मौजूद रहकर संपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए पुलिस टीम का मार्गदर्शन किया तथा डीआईजी आजमगढ़ श्री सुनील कुमार सिंह ने मौके पर मौजूद रहकर टीम का समन्वय एवं सतत पर्यवेक्षण किया*
*11 वर्षीय बच्ची ने बताया—पिता अरविंद ने ही भाई शौर्य को मारी थी गोली और बच्चों को दी थी जान से मारने की धमकी*
*फॉरेंसिक एवं बैलेस्टिक एक्सपर्ट्स की अब तक की जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने की प्रकृति, ट्रैजेक्टरी एवं एंट्री वुंड से संबंधित तथ्य पुलिस के आधिकारिक पक्ष से मेल खाते हैं—शौर्य की मृत्यु पुलिस की गोली से नहीं, बल्कि अरविंद द्वारा चलाई गई गोली से हुई*
आजमगढ़। शम्भूपुर हत्याकांड में तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों एवं लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ कमरे में बंद हो गया था। पुलिस एवं परिजन करीब 07 घंटे तक उसे समझाते रहे तथा बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की अपील करते रहे, लेकिन उसने बच्चों को बाहर नहीं आने दिया। इस दौरान वह लगातार बच्चों को गोली मारने की धमकी दे रहा था।
एडीजी वाराणसी जोन श्री नवीन अरोड़ा घटनास्थल पर लगातार मौजूद रहे तथा पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए पुलिस टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश एवं मार्गदर्शन देते रहे। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनके निर्देशन में पुलिस टीम द्वारा रणनीतिक रूप से कार्रवाई की गई। गोली चलने की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कमरे में प्रवेश कर घायल बच्चे शौर्य को तत्काल अस्पताल भिजवाया। पूरे ऑपरेशन के दौरान एडीजी जोन द्वारा पुलिसकर्मियों एवं बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टीम का कुशल नेतृत्व किया गया।
डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र श्री सुनील कुमार सिंह भी पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे तथा पुलिस टीम से समन्वय बनाते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश एवं मार्गदर्शन देते रहे। उनके सतत पर्यवेक्षण में पुलिस टीम द्वारा दोनों बच्चियों को सकुशल रेस्क्यू किया गया तथा घायल बच्चे को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
देर रात कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आने पर बच्चों की जान पर तत्काल खतरा देखते हुए एसएसपी आजमगढ़ डॉ0 अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह एवं आरक्षी प्रदीप ने जान जोखिम में डालकर दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। कमरे के अंदर नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। पुलिस टीम द्वारा उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
*पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य-*
*1. गोली लगने की दूरी से संबंधित तथ्य*
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्चे के एंट्री वुंड पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग एवं स्कॉर्चिंग के चिह्न पाए गए हैं, जो सामान्यतः बहुत नजदीकी दूरी से गोली चलने की स्थिति में पाए जाते हैं। घटनास्थल पर पुलिस टीम एवं बच्चे के बीच की दूरी लगभग 8–10 फीट थी। उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार पुलिस टीम के लिए इतनी दूरी से बच्चे के नजदीक पहुंचकर गोली लगने की स्थिति उत्पन्न होना संभव नहीं था, क्योंकि पुलिस टीम कमरे के एक छोर पर तथा आरोपी बच्चों के साथ दूसरे छोर पर था। पुलिस टीम बच्चों तक आरोपी को नियंत्रित किए जाने के बाद ही पहुंच सकी।
*2. गोली की ट्रैजेक्टरी से संबंधित तथ्य*
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे के शरीर में गोली की ट्रैजेक्टरी तिरछी एवं ऊपर की दिशा में पाई गई है। बच्चे की कम ऊंचाई को देखते हुए उपलब्ध परिस्थितियों में इस प्रकार की ट्रैजेक्टरी का विश्लेषण किया जा रहा है। फॉरेंसिक एवं बैलेस्टिक विशेषज्ञों द्वारा घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों के साथ इसका परीक्षण किया जा रहा है।
*3. एंट्री वुंड से संबंधित तथ्य*
मृतक शौर्य के शरीर में गोली का प्रवेश गाल से तथा निकासी सिर की ओर हुई है। पोस्टमार्टम में दर्ज एंट्री वुंड एवं घटनास्थल से बरामद आरोपी के .32 बोर रिवाल्वर से संबंधित साक्ष्यों का फॉरेंसिक एवं बैलेस्टिक परीक्षण किया जा रहा है। उपलब्ध जांच में इन तथ्यों का परीक्षण घटनास्थल से प्राप्त अन्य साक्ष्यों के साथ किया जा रहा है।
*4. आरोपी द्वारा बच्चों को गोली मारने की धमकी*
पुलिस एवं परिजनों द्वारा आरोपी को समझाने के दौरान भी वह अपनी मां, चाचा, भतीजियों एवं बहनों को बच्चों को गोली मारने की धमकी दे रहा था। इससे कमरे के अंदर मौजूद बच्चों पर तत्काल खतरा बना हुआ था।
*5. रेस्क्यू की गई बच्ची का कथन*
पुलिस टीम द्वारा सकुशल रेस्क्यू की गई 11 वर्षीय परी ने पुलिस को बताया कि उसके पिता अरविंद ने ही उसके भाई शौर्य को गोली मारी थी। परी घटनाक्रम के दौरान आरोपी के साथ कमरे में मौजूद थी। उसने यह भी बताया कि अरविंद बच्चों को जान से मारने की धमकी दे रहा था। उसका कथन घटनास्थल की परिस्थितियों एवं उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के साथ विवेचना में महत्वपूर्ण है।
*6. घटनाक्रम की परिस्थितियां*
अरविंद द्वारा अपनी पत्नी की हत्या करने तथा अपनी भतीजी पर कुल्हाड़ी से हमला किए जाने के बाद भी वह लगातार हिंसक व्यवहार कर रहा था। इसके बाद बच्चों को कमरे में बंद कर उनके साथ मौजूद रहते हुए गोली मारने की धमकी देना, बच्चे को गोली लगना तथा रेस्क्यू की गई बच्ची का कथन पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को दर्शाता है।
*पुलिस की जवाबी कार्रवाई*
शौर्य को गोली लगने के बाद भी अरविंद द्वारा पुलिस टीम पर फायरिंग की गई। बच्चों की सुरक्षा एवं पुलिस टीम की आत्मरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियंत्रित जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें अरविंद घायल हुआ। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस का आधिकारिक पक्ष है कि शौर्य को पुलिस की गोली नहीं लगी थी। उपलब्ध पोस्टमार्टम निष्कर्ष, घटनास्थल की परिस्थितियों, गोली की ट्रैजेक्टरी, एंट्री वुंड से संबंधित तथ्यों तथा रेस्क्यू की गई बच्ची के कथन के साथ-साथ फॉरेंसिक एवं बैलेस्टिक एक्सपर्ट की अब तक की जांच रिपोर्ट के आधार पर शौर्य को गोली अरविंद द्वारा मारी गयी है।
*अब अकेली नहीं होंगी दोनों मासूम*
शम्भूपुर हत्याकांड में दोनों मासूम बच्चियां माता-पिता के साये से महरूम हो गई हैं। ऐसे में आजमगढ़ पुलिस परिवार ने दोनों बच्चियों के पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा एवं भविष्य में सहयोग की जिम्मेदारी निभाने का निर्णय लिया है। एसएसपी आजमगढ़ डॉ0 अनिल कुमार अपना एक माह का वेतन, जबकि जनपद के समस्त पुलिसकर्मी एक दिन का वेतन दोनों बच्चियों के लिए देंगे।
घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य संकलित किए गए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बच्ची के कथन एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई प्रचलित है।






