आजमगढ़ : रिटायर स्वास्थ्यकर्मी श्यामसुंदर गुप्ता ने जेएनयू व अन्य मुद्दों पर क्या कुछ कहा देखें एक रिपोर्ट
यह लेख टीवी २० न्यूज़ को रिटायर स्वास्थ्यकर्मी श्यामसुंदर गुप्ता ने भेजी है और इसकी कापी वरिष्ठ मंत्रियों को भेजी है जिसमें उन्होंने शिक्षा जगत पर कई कमेंट्स किये है | श्री गुप्ता ने सबका ध्यान विभिन्न मुद्दों पर आकृष्ट कराते हुए लिखा है कि माननीय राष्ट्रपति प्रधानमंत्री गृहमंत्री शिक्षा मंत्री भारत सरकार तथा साथ ही विपक्ष के सभी सम्मानित नेतागण बुद्धिजीवी गण आप सभी का ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूं की क्या जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जो कुछ हो रहा है क्या वह उचित है क्या तर्कसंगत है क्या देश में हित में है क्या जेएनयू में ही पढ़ने वाले लोग छात्र हैं और बकिया देश के छात्र जो हैं कीड़े मकोड़े हैं जो इनको हर प्रकार की विशेष सुविधा प्रदान की गई है फिर भी असंतुष्ट हैं समझ से परे है। इनके आंदोलन को दिग्भ्रमित करने वाले लोग अपने को इनके पिता के रूप में देखते तो शायद इस प्रकार इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करते महोदय यदि मेरे विचार आप सभी को उचित एवं राष्ट्रहित में लगे तो भारतवर्ष के अंदर जितने भी केंद्रीय विद्यालय हैं सबको एक समान सुविधा तथा महत्त्व एवं शुल्क लागू होना चाहिए । जिससे सभी छात्रों को एक समान सुविधा मिल सके । महोदय जेएनयू के लोगों को काफी कष्ट है इनको आजादी मिलनी चाहिए आजादी किस से चाहते हैं दिल्ली के प्रदूषण से या ठंडक से या पढ़ने से। क्यों ना इन्हें भी अन्य विश्वविद्यालयों में पढ़ने का अवसर दिया जाए ।तथा साथ ही ऐसे अध्यापक जिन्हें आजादी चाहिए उन्हें भी उन्हें भी उनके मनपसंद विश्वविद्यालय में स्थानांतरित कर दिया जाए। मैं नहीं समझता इसके बाद इनकी समस्या बची रहेगी मेरे विचार में शिक्षा के मंदिर में किसी भी राजनीतिक दल का हस्तक्षेप प्रवेश हर हालत में निसिदधहोना चाहिए क्योंकि बच्चे पढ़ने जाते हैं मां-बाप के अरमान होते हैं बड़ी मुसीबतों से लोग पैसा इकट्ठा करके बच्चों को शिक्षा के लिए बाहर भेजते हैं महोदय एक बार का किस्सा मैं बताऊं जोमेरेजीवन में घटित हुआ जिस विद्यालय में पढ़ता था वहां पर मामूली विवाद में गोली चल गई जब मैं रास्ते में घर जा रहा था तो देखा मेरे पिताजी साइकिल से मेरा हाल चाल लेने आ रहे थे मैंने पूछा पिताजी आपको कभी मैंने साइकिल चलाते तो नहीं देखा तो उन्होंने कहा कि 32 वर्ष बाद आज मैं साइकिल पर फिर चढ़ा हूं क्योंकि औलाद की पीड़ा आप नहीं समझोगे। महोदय क्या आप लोग सोचते हैं यह बच्चे देश के भविष्य हैं इनका भविष्य संवारना चाहिए नकी आंदोलन करना चाहिए या कराना चाहिए ।यदि आप लोग महात्मा गांधी चनद शेखर आजाद सरदार भगत सिंह सुभाष चंद्र बोस के आदर्शो पर चलते हैं तो कम से कम इन्हीं बच्चों के साथ गरीबों की बस्ती तथा झोपड़पट्टी में श्रमदान कर सफाई का कार्य पुल निर्माण का कार्य करें कितना प्रशंसनीय होगा तथा राष्ट्र की प्रगति में सहायक होगा। लोक प्रशंसा करेंगे अनुकरण करेंगे महोदय क्या विद्यालय का चुनाव विद्यालय के अंदर नहीं हो सकता है सड़क पर प्रदर्शन क्या आवश्यक है कागज की बर्बादी पेट्रोल की बर्बादी सड़क अवरुद्ध करना ध्वनि प्रदूषण करनानियमों का उल्लंघन करना पुलिस पर हमला करना सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना क्या यही आदर्श है इसी से देश की प्रगति होगी । महोदय उपरोक्त के प्रकाश में आप सभी से प्रार्थना है कि जनहित तथा राष्ट्रहित में सख्त कदम उठाते हुए इस आंदोलन को तुरंत समाप्त करायाजाए तथा बेरोजगारी शिक्षा कुपोषण आदि पर ध्यान देते हुए राष्ट्र की प्रगति के बारे में सोचे। महोदय यदि राष्ट्र बचा रहेगा तभी राजनीति हो पाएगी देश की प्रगति अवरुद्ध ना करिए इससे नहीं आप का भला होगा नहीं जनमानस का बल्कि आप लोग हंसी के पात्र बन रहे हैं। आशा ही नहीं बरनपूर्ण विश्वास है कि आप लोग एक जिम्मेदार पिता नागरिक तथा देशभक्त के रूप में अपने को रखते हुए उचित कदम उठाएंगे तथा सहयोग देंगे धन्यवाद






