आजमगढ़ : नवनिर्मित हरिऔध कला केंद्र के तकनीकी खामियों के बाबत जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा

आजमगढ़ । राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त रंगकर्मी ममता पंडित और समूहन कला संस्थान के सचिव राजकुमार शाह द्वारा आज दिनांक 27 अक्टूबर को सूत्रधार संस्थान के प्रतिनिधि की ओर संयुक्तरूप से आजमगढ़ जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज से मिलकर नवनिर्मित श्री हरिऔध कला केंद्र के तकनीकी खामियों के बाबत जिला प्रशासन को प्रमुख सचिव संस्कृति को सम्बोधित ज्ञापन सौपा जिसमें निम्न विषयों पर चिंता प्रकट की गई है और उसके सुधार की मांग की गई है। उ० प्र० के जनपद आजमगढ़ में नवनिर्मित हरिऔध कला केन्द्र प्रेक्षागृह में तकनीकि त्रुटियों को सुधारने हेतु निवेदन किया गया है की राहुल सांकृत्यायन प० अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की धरती उ० प्र० का जनपद आजमगढ़ कला संस्कृति, साहित्य की दृष्टि से समृद्ध परन्तु सदैव संसाधन विहीन रहा है। जनपद में रंगकर्म का एक सुनहरा और कर्मठ इतिहास रहा है। पृष्ठभूमि आज़मगढ़ में 1934 से 1956 तक की संसाधनविहीन रंगयात्रा जो 1978 में फिर से सक्रिय हुई, वह लगातार अब तक जीवटतापूर्वक निरन्तर जारी है। यह यात्रा सदैव बुनियादी संसाधनो के अभाव में ही सतत क्रियाशील है। वर्ष 2007 में एक बार उम्मीद जगी जब जनपद का पहला रंग भवन राहुल सांकृत्यायन प्रेक्षागृह संस्कृति विभाग उ० प्र० के द्वारा दिया गया, परन्तु यह प्रेक्षागृह अपने कार्य हेतु उपयोगी होने के बजाय व्यवस्था का शिकार हो गया। समय-समय पर माँग उठी, आंदोलन हुए तो मरम्मत, नवीनीकरण आदि के नाम पर धन का खूब अपव्यय हुआ, परन्तु प्रेक्षागृह सही नही हुआ और वर्तमान में जीर्ण शीर्ण हालात में है और वह कभी भी जनपद के रंगकर्म के लिए उपयोगी नही हो पाया। जनपद की किसी जमाने में सांस्कृतिक पहचान रहे हरिऔध कला भवन जय गिर गया तो कई आंदोलनों के बाद शासन द्वारा वहाँ एक कला केन्द्र के निर्माण की घोषणा से फिर से एक आस जगी और देर से ही सही 9 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद दिनांक 07 अप्रैल 2023 को देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री मा० अमित शाह जी के द्वारा उ० प्र० के मा० मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की गरिमामयी उपस्थिति में हरिऔध कला केन्द्र लोकार्पित हुआ। इससे जनपद के कलाकर्म से जुड़े लोगो में हर्ष है, परन्तु हमारी आँखो में एक चिन्ता भी है कि कहीं यह कला केन्द्र भी राहुल सांकृत्यायन प्रेक्षागृह जैसा न हो जाये। वर्तमान स्थिति हरिऔध कला केन्द्र के पहले दो विशेष आयोजनों “रामायण कॉनक्लेव” और “आजमगढ़ महोत्सव” दोनो से यह बात साफ हो गई है कि प्रेक्षागृह का लाइट एण्ड साउण्ड परफार्मिंग आर्ट के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं है। इस हॉल में केवल सेमिनार गोष्ठि आदि की ही उपयुक्तता है कलात्मक और रंगमचीय प्रस्तुतियों के लिए प्रोसेनियम और मंच के उपांग दोषपूर्ण है। प्रकाश एवं ध्वनि उपकरण रंगमंचीय नहीं है और उसमें पर्याप्त सुधार की आवश्यकता है। कुछ माह पूर्व उ० प्र० संगीत नाटक अकादमी के प्रतिनिधि द्वारा राज्य नाट्य समारोह के आयोजन के लिए मुख्य विकास अधिकारी से वार्ता के दौरान भी इसके प्रेक्षागृह को तकनीकि रूप से नकार दिया गया है। और धन का व्यय सही नियत से नहीं हुआ है। जिले के रंगकर्मियों द्वारा बार-बार शिकायत ऐसा लगता है कि इसके निर्माण में किसी भी विशेषज्ञ का तकनीकि उपयोग नहीं किया है। है और पुराना पत्र उपलब्ध नहीं होता है। इस प्रकार रंगकर्मियों की ऊर्जा नष्ट करना पत्र दिये जाने के बावजूद जब भी बात होती है तो नया पत्र लिखकर देने के कहा जाता हो जाती है और कलाकारों को तब पता चलता है जब कहीं किसी समाचार में खबर आ हतोत्साहित करने वाली है। कई बार इस मामले में जाँच की की खबरे आती है जो गुपचुप जाती है। इन अवसरो पर रंगकर्मियों को बात रखने के लिए नहीं बुलाया जाता और पिछले किसी भी शिकायती आवेदन का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना इसकी कार्य प्रणाली की नियत अभिषेक पंडित लम्बे अर्से से सक्रिय हैं। इसके निर्माण में प्रेक्षागृह के आवश्यक तकनीकि दो राष्ट्रीय स्तर के रंगकर्मी राजकुमार शाह और पहलुओं का अनदेखा किया जाना, इसके भारी भरकम लागत से निर्मित इस केन्द्र / प्रेक्षागृह के भविष्य और कलाकर्म में इसकी उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह है।
पर प्रश्न खड़ा करता है। जनपद
ऐसे में यह बहुत ही आवश्यक हो गया है कि इसके लागत पर सम्यक जाँच हो, विशेषज्ञ तकनीकिशीयन को शामिल करते हुए मंच और लाइट एवं साउंड व्यवस्था को रंगमंचीय प्रेक्षागृह की आवश्यकताओं के अनुरूप सुधार किया जाय ।
निवेदन / माँग 1. हम जनपद के रंगकर्मी / रंग संस्थाये यह अनुरोध करते है कि हरिऔध कला केन्द्र के मंच में, इसके उपांगों यथा ग्रीन रूम से प्रवेश मार्ग, विंग्स, बैक कर्टेन पर्दे आदि में प्रोसेनियम के अनुसार सुधार कर त्रुटियों को दूर किया जाय ।
2. मंच पर प्रयुक्त होने वाले ध्वनि एवं प्रकाश उपकरण रंगमंचीय नहीं हैं,
संशोधन किया जाय और रंगमचीय उपकरणो और कन्सोल को पुनः कार्य की उनमें आवश्यक आवश्यकतानुसार संयोजित किया जाय और अनुभवी विशेषज्ञता वाले व्यक्ति से उसका संचालन कराया जाय ।