TV 20 NEWS||AZAMGARH;निराश्रित एवं असहाय गौवंश संरक्षण, संवर्धन व समुचित देखभाल के लिए संचालित बहुआयामी योजनाओं का प्रदेश भर में सकारात्मक परिणाम

उ0प्र0 गौ सेवा आयोग के मा0 उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल एवं मा0 सदस्य दीपक गोयल ने अपने दो दिवसीय जनपद भ्रमण के दौरान जनपद के विभिन्न गौ आश्रय स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षणोपरान्त भ्रमण के दूसरे दिन कलेक्ट्रेट सभागार में में गोवंश संरक्षण एवं अनुश्रवण समिति की बैठक पश्चात प्रेस प्रतिनिधियो से वार्ता कर गो आश्रय स्थलों की स्थिति, सुधारात्मक कार्य योजना व योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

गौ आश्रय स्थलों की हकीकत जानने हेतु मा0 उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल एवं मा0 सदस्य दीपक गोयल ने जनपद के 04 वृहद व अस्थाई गौआश्रय स्थलों का निरीक्षण किया। इसी क्रम में उन्होने विकास खण्ड अतरौलिया के वृहद गोसंरक्षण केन्द्र मकरहा, विकास खण्ड अहरौला के अस्थाई गौआश्रय स्थल बस्ती भुजवल, विकास खण्ड कोयलसा के कोटवा जलाल अस्थाई गौआश्रय स्थल एवं विकास खण्ड बिलरियागंज के वृहद गोसंरक्षण केन्द्र गदनुपर हिछनपट्टी का निरीक्षण कर पशुओं के लिए टीन शेड, पेयजल, हरा चारा, वृक्षारोपण/छायादार स्थान, चूनी- चोकर आदि बिन्दुओं पर केयरटेकरों व संबंधित खण्ड विकास अधिकारी व पशु चिकित्सकों को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए सुधार करने पर बल दिया।

बैठक के दौरान स्थायी एवं अस्थायी गो-आश्रय स्थलों से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर गहन समीक्षा की गई। बैठक में सड़कों एवं खेतों में विचरण कर रहे निराश्रित/ बेसहारा गोवंशों को संरक्षित करने, मा0 मुख्यमंत्री सहभागिता योजना में विकास खण्डवार जीवित गोवंश एवं फण्ड रिक्वेस्ट एवं सहभागियों को सुपुर्दगी में गोवंशों को दिये जाने की अपील की गयी। चारागाह सम्बद्ध भूमि पर हरा चारा उत्पादन हेतु प्रदत्त धनराशि के सापेक्ष हरे चारे/नैपियर घास लगवाये जाने की प्रगति, भूमि गाटा संख्या, ग्राम का नाम, तैयारी की सूचना आदि की जानकारी ली गयी। 100 से कम गोवंश संख्या वाले गौआश्रय स्थलों में गोवंशों को बढ़ाने अथवा वृहद गौ संरक्षण केन्द्र मंे स्तानान्तरित किये जाने पर बल दिया गया। ग्रीष्म ऋतु से संरक्षित गोवंशांे को बचाव हेतु एडवाजरी जारी की गयी। वृहद गौ संरक्षण केन्द्र की स्थापना हेतु भूमि चिन्हांकन, दान एवं क्रय भूसा संग्रहण, एसएफसी पूलिंग सहित विभिन्न बिन्दुओं पर समिति द्वारा समीक्षा बैठक करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया।

मा. उपाध्यक्ष ने निर्देश दिए कि गोवंश की देखभाल में लगे कर्मियों का भुगतान समय से सुनिश्चित किया जाए तथा उनका मानदेय मनरेगा द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप दिया जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि गोशालाओं का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। साथ ही सभी गो-आश्रय स्थलों पर पौधारोपण सुनिश्चित कराने हेतु प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देश दिए गए।

बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि हाईवे पर दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को तत्काल निकटतम गो-आश्रय स्थल में सुरक्षित रखा जाए। गर्मी के दृष्टिगत गो-आश्रय स्थलों पर टिन शेड के ऊपर पुआल डालने, स्वच्छ पेयजल एवं छाया की समुचित व्यवस्था कराने के निर्देश संबंधित संचालकों को दिए गए। सभी गो-आश्रय स्थलों की सुरक्षा एवं निगरानी हेतु संबंधित थानों की पुलिस को भी नियमित रूप से निरीक्षण के निर्देश दिए गए।

मा0 उपाध्यक्ष व सदस्य ने बैठक व प्रेस प्रतिनिधियों से वार्ता के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के दूरदर्शी एवं कुशल नेतृत्व में उ०प्र० सरकार गौ सेवा को केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय, सामाजिक एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार करते हुए सतत् कार्य कर रहीं है। राज्य सरकार द्वारा निराश्रित एवं असहाय गौवंश के संरक्षण एवं समुचित देखभाल के लिए व्यापक एवं बहु आयामी योजनाएं संचालित की जा रही है, जिनके सकारात्मक परिणाम प्रदेश भर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे है। उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जहाँ निराश्रित गौवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार द्वारा 50 रू0 प्रतिदिन की दर से भरण-पोषण की धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है।

प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गौ-सरंक्षण नीति के अर्न्तगत वर्तमान में राज्य के विभिन्न जनपदों में 7,700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल सकिय रूप से संचालित हो रहे है। इन आश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वच्छ पेयजल तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलबध कराई जा रही है। यह व्यवस्था न केवल गौवंश के संरक्षण को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक संतुलन को भी सुदृढ़ कर रही है।

उपाध्यक्ष ने बताया कि गौशालाओं के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा 5,446 गौशालाओं में 7,592 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गये हैं। अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली 24ग7 कार्यरत रहकर गौवंश की सुरक्षा देखभाल की गुणवत्ता तथा प्रशासनिक जवाबदेही कर रही है।

मा० मुख्यमंत्री जी निराश्रित गौवंश सहभागिता योजना के माध्यम से सरकार ने गौ- संरक्षण को जन आंदोलन का रूप प्रदान किया गया है। इस योजना के अन्तर्गत अब तक 1,67,065 गौवंश इच्छुक एवं जिम्मेदार गौपालकों को सुपुर्द किए गये है। सरकार द्वारा प्रत्येक गौवंश के लिए 50 रू० प्रतिदिन की दर से पोषण भत्ता सीधे गौपलाकों के बैंक खातों में डीबीटी मे माध्यम से प्रेषित किया जा रहा है। यह पहल न केवल गौवंश के संरक्षण में सहायक है, बल्कि गौपलकों की आय वृद्धि में भी महत्पूर्ण भूमिका निभा रहा है।

जनपद आजमगढ़ में जिला प्रशासन द्वारा गौ- सरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में जनपद में कुल 92 गो आश्रय स्थल क्रियाशील हैं, जिनमें 9050 गौवंश का संरक्षण एवं पालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 1357 प्रगतिशील गौपलकों ने सहभागिता योजना के अन्तर्गत 2253 गौवंश को अपनाकर सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार उ०प्र० गोवध निवारण अधिनियम 1955 के अन्तर्गत गौवंश के सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। जीरो टॉलरेंस नीति गोवंश सरंक्षण से सम्बन्धित नियमों के उल्लंघन पर त्वरित एवं कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। उपाध्यक्ष ने बताया कि मा० मुख्यमंत्री जी ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि निराश्रित गौवंश की सेवा एवं संरक्षण के लिए कोई कमी नही आने दी जायेगी। राज्य सरकार गौवंश के प्रति अपनी संवेदनशीलता मानवीय एवं समर्पित दृष्टि के साथ सुशासन के सिद्धांतो को साकार करने के लिये निरन्तर प्रयासरत है।

अंत में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि शासन की मंशा के अनुरूप गोवंश संरक्षण कार्यों को पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ संचालित किया जाएगा।

मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना ने आश्वस्त किया कि बैठक में दिए गए सभी निर्देशों एवं मार्गदर्शन का अक्षरशः पालन कराया जाएगा तथा संबंधित अधिकारियों को शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन, अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 गम्भीर सिंह, परियोजना निदेशक सच्चिदानंद प्रसाद, डीसी मनरेगा राम उदरेज यादव, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला सूचना अधिकारी डॉ0 पंकज कुमार, समस्त खण्ड विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी व अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।