श्रवण-बाधित बच्चों के लिए कॉक्लियर इंप्लांट बनी नई उम्मीद
आजमगढ मुकेरीगंज स्थित विद्या-श्री ईएनटी एंड लेजर सेंटर, के डॉ. विनय प्रकाश सिंह ने बताया कि जन्मजात अथवा गंभीर श्रवण-बाधिता की जल्द पहचान होने पर बच्चे को सुनने और बोलने की क्षमता विकसित करने में बेहतर अवसर मिल सकता है लंबे समय तक सुनने की क्षमता प्रभावित रहने से बच्चे के भाषा विकास, बोलने की क्षमता, शिक्षा, आत्मविश्वास और सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ द्वारा कॉक्लियर इंप्लांट से आधुनिक चिकित्सा विकल्प हो सकता है।
डॉ. विनय प्रकाश सिंह के अनुसार कॉक्लियर इंप्लांट की प्रक्रिया केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। इसमें सुनने की जांच, विस्तृत श्रवण परीक्षण, मरीज का चयन एवं परामर्श, कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी, इंप्लांट सक्रिय करना एवं उसकी सेटिंग करना तथा श्रवण और वाणी पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण चरण शामिल होते हैं। इसके बाद नियमित जांच और आवश्यकतानुसार पुनर्वास भी जरूरी है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में सुनने की क्षमता से संबंधित किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें। जितनी जल्दी समस्या की पहचान कर उचित हस्तक्षेप और पुनर्वास शुरू किया जाएगा, बच्चे के श्रवण एवं वाणी विकास की संभावनाएं उतनी ही बेहतर होंगी।
डॉ. सिंह ने कहा कि “उद्देश्य केवल ऑपरेशन करना नहीं, बल्कि ऐसे बच्चे को सुनने, समझने और अपनी बात कहने का अवसर देना है, जो अब तक आवाजों की दुनिया से दूर रहा है।” इस अवसर पर






