*TV 20 NEWS || LUCKNOW: प्रधानमन्त्री ग्रामीण सड़कों के निर्माण और गड्ढामुक्त अभियान में तेजी लाएं अधिकारी : उप मुख्यमंत्री*

प्रेस विज्ञप्ति

• प्रधानमन्त्री ग्रामीण सड़कों के निर्माण और गड्ढामुक्त अभियान में तेजी लाएं अधिकारी : उप मुख्यमंत्री

• ग्रामीण सड़कों के कायाकल्प से विकास की राह हुई सुगम, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने गांवों में विकास का पहिया तेज किया : केशव प्रसाद मौर्य

• एक दशक में उत्तर प्रदेश में PMGSY के तहत 25,552.973 किलोमीटर सड़कों का निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार के अवसरों तक बढ़ी ग्रामीणों की पहुंच

मा0 उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी

लखनऊ| 24 सितम्बर 2026, उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने विभागीय जानकारी लेते हुए मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री शिवसहाय अवस्थी को निर्देशित किया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में मार्गों के निर्माण, मरम्मत एवं गड्ढामुक्त अभियान के कार्यों में और तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता एवं आवागमन की सुगमता सरकार की प्राथमिकताओं में है। निर्माणाधीन मार्गों के कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण कराए जाएं तथा गड्ढायुक्त मार्गों को अभियान चलाकर शीघ्र गड्ढामुक्त किया जाए। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के माध्यम से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को नई गति मिली है। वर्ष 2022 से अब तक ग्रामीण मार्गों के निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण से गांवों में विकास की राह बनी है और विकास का पहिया तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि PMGSY अब केवल ग्रामीण बसावटों को जोड़ने की योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली व्यापक अवसंरचना पहल बन चुकी है। PMGSY-I और II के माध्यम से पात्र ग्रामीण बसावटों को हर मौसम सड़क संपर्क उपलब्ध कराया गया, जबकि PMGSY-III के अंतर्गत प्रमुख ग्रामीण संपर्क मार्गों और थ्रू रूट्स के उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे गांवों की कृषि मंडियों, विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों के केंद्रों तक पहुंच आसान हुई है।

विभाग ने बताया कि पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश में PMGSY के अंतर्गत 25,552.973 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया जा चुका है — यह आंकड़ा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि किस प्रकार निरंतर प्रयासों से ग्रामीण उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली जा रही है। वर्ष 2022-23 और 2023-24 में क्रमशः 5,011.091 किमी और 6,798.809 किमी की उपलब्धि इस अवधि की सर्वाधिक प्रगति को दर्शाती है, जो योजना की गति और सरकार की प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है। यह केवल आंकड़े नहीं, बल्कि लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन में आई सुगमता, अवसर और आशा की कहानी है।

फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (FDR) तकनीक से होने वाली बचत
* निर्माण लागत में बचत: परंपरागत सड़क निर्माण विधियों की तुलना में FDR तकनीक से सड़क निर्माण लागत में लगभग 20-30 प्रतिशत तक की बचत होती है, क्योंकि पुरानी सड़क की मौजूदा सामग्री का ही पुनः उपयोग किया जाता है।
* प्राकृतिक संसाधनों की बचत: मौजूदा सड़क सामग्री (गिट्टी, मोरम आदि) को यथास्थान पुनर्चक्रित (recycle) किए जाने से नई गिट्टी, बजरी और मिट्टी जैसे प्राकृतिक संसाधनों के खनन और उपयोग में भारी कमी आती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिलता है।
* परिवहन लागत एवं ईंधन की बचत: निर्माण सामग्री को दूर-दराज की खदानों से लाने की आवश्यकता कम हो जाने से ढुलाई (haulage) पर होने वाला व्यय और डीजल की खपत उल्लेखनीय रूप से घटती है, जिससे परियोजना लागत के साथ-साथ सड़क यातायात पर भी दबाव कम होता है।
* समय की बचत: FDR तकनीक में निर्माण कार्य यथास्थान (in-situ) एवं तीव्र गति से संपन्न होता है, जिससे परियोजना पूर्णता की अवधि परंपरागत विधियों की तुलना में काफी कम हो जाती है और ग्रामीणों को सड़क सुविधा शीघ्र उपलब्ध हो पाती है।
* कार्बन उत्सर्जन में कमी: नई सामग्री के उत्पादन, खनन और लंबी दूरी की ढुलाई में कमी आने से जीवाश्म ईंधन की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट आती है, जो कार्बन क्रेडिट प्राप्ति की संभावनाओं को भी सुदृढ़ करती है।
* टिकाऊपन एवं दीर्घायु : FDR तकनीक से बनी सड़कें अधिक मजबूत आधार (base) के साथ तैयार होती हैं, जिससे रखरखाव पर होने वाला दीर्घकालिक व्यय घटता है और सड़क का जीवनकाल बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि GPS, डैशकैम और AI आधारित वाहन ट्रैकिंग प्रणाली से निर्माण कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही को मजबूत किया गया है। बेहतर ग्रामीण सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और ग्रामीण समृद्धि की मजबूत आधारशिला हैं।