• बच्चों को सर्दी-जुकाम से बचाएं
• घर के आस-पास रखें साफ–सफाई तथा करें मच्छरदानी का प्रयोग
आजमगढ़, 2 मार्च 2022
दिन और रात के तापमान में अंतर से यानी बदलते मौसम से होने वाली बीमारियों का ग्राफ जनपद में आजकल काफी बढ़ा हुआ है। मंडलीय जिला चिकित्सालय की ओपीडी में आधे मरीज सिर्फ सर्दी-जुकाम,बुखार,सांस फूलने और उल्टी-दस्त के आ रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आईएन तिवारी का कहना है आजकल के मौसम में बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है।
मंडलीय जिला चिकित्सालय में तीन बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी होती है जिसमें एक डाक्टर कि ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 50 से 60 मरीज आते हैं। उनमें से 25 से 30 मरीज सर्दी-जुकाम,बुखार,सांस फूलने और उल्टी-दस्त के होते हैं। इस तरह ओपीडी में आने वाला हर दूसरा मरीज बदलते मौसम का शिकार है। ऐसे में सतर्क रहने की आवश्यकता है। जिला अस्पताल में दिसम्बर माह में 2216 मरीज, जनवरी में 2466 मरीज तथा फरवरी में अब तक 2392 मरीजों की ओपीडी की गयी है।
डॉ तिवारी ने बताया कि बदलते मौसम में बच्चों की परवरिश पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अगर बच्चों पर ध्यान नहीं दिया गया तो बच्चे बीमार पड सकते हैं। इस मौसम में बच्चों को तीन तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, पहला- सर्दी, खांसी, जुकाम एवं बुखार, दूसरा- उल्टी-दस्त और बुखार तथा तीसरा- डेंगू,मलेरिया, चिकनगुनिया तथा मच्छरजनित रोग।
उन्होने बताया कि बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी, खांसी, जुकाम, निमोनिया उल्टी तथा दस्त की संभावना रहती है। इसलिए सतर्क रहें और अपने बच्चे को सर्दी-जुकाम से बचायें। किसी भी तरह की समस्या होने पर अपने बच्चे को नजदीकी अस्पताल में तुरंत दिखायें तथा इलाज करें।
मंडलीय जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ परामर्शदाता एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रईस अहमद ने बताया कि मंडलीय जिला अस्पताल में हमारी ओपीडी कमरा नंबर 20 में होती है। खासतौर से बच्चों के लिए उल्टी-दस्त होने पर सावधान रहें। साफ पीने के पानी का प्रयोग करें तथा घर का बना हुआ ताजा खाना खिलायें, बासी खाना खिलाने से परहेज करें। बच्चे को बाजार की कोई भी खुली हुई चीज बिलकुल न खिलायें। छोटे बच्चे पर ध्यान देना है कि वे कोई भी जमीन पर गिरी हुई चीज उठाकर न खाएं तथा बच्चों को खेलने के लिए ऐसे खिलौने दें, जो धुलकर साफ किया जा सके।
डॉ अहमद ने बताया कि बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएँ एवं कमरे में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें तथा सफाई रखें। घर में ओआरएस का पैकेट जरूर रखें, ताकि उल्टी-दस्त होने पर बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाया जा सके।
उल्टी होने पर ओआरएस का घोल या अन्य पेय पदार्थ जैसे दाल का पानी, पतली दलिया तथा मांड थोड़ी-थोड़ी मात्रा में जल्दी-जल्दी देना सुनिश्चित करें, यदि बच्चा उल्टी करता भी है तो थोड़ा-थोड़ा ओआरएस का घोल तथा पेय पदार्थ देते रहें। ओआरएस के पैकेट दो तरह के होते हैं – छोटा पैकेट 200 मिलीलीटर (1 गिलास) पानी में घोलना होता है, तथा बड़ा पैकेट 1 लीटर पानी में घोलना होता है। घोल बनाते समय, सही संयोजन आवश्यक है अन्यथा यह हानिकारक भी हो सकता है।
बुखार आने पर सूती गीले कपड़े से शरीर को पोंछना, बुखार उतारने का एक उपयोगी तरीका है। अगर ठंढ देकर बुखार आ रहा है तो मलेरिया हो सकता है, खून की जांच करायें तथा यथाशीघ्र इलाज करना सुनिश्चित करें।
अमुआरी निवासी चार वर्षीय गुड़िया की माँ रेनू ने बताया की इसे एक महीने पहले सांस फूलने के साथ लगातार हिचकी आने की समस्या थी। डाक्टर को दिखाकर दवा लिया। अब गुड़िया को पहले से काफी आराम है।
अराजी देवारा करखिया निवासी तीन वर्षीय पूजा यादव के चाचा ब्रजभान यादव ने बताया कि पूजा को खांसी होने और सांस फूलने कि समस्या होने पर पाँच दिन पहले दिखाया था। डाक्टर ने दवा लिखा था। आज फिर बुलाया गया था। पूजा अब ठीक है।






