आजमगढ़ : एक सार्थक कल की शुरुआत, परिवार नियोजन के साथ- सीएमओ

 

• महिलाएं अंतरा व छाया अपनाएं- अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाएँ
• आधुनिक गर्भनिरोधक साधन अंतरा इंजेक्शन व छाया साप्ताहिक गोली पर दो दिवसीय प्रशिक्षण
आजमगढ़, 23 मार्च 2022
जनसंख्या स्थिरीकरण में परिवार नियोजन के समस्त स्थायी व अस्थायी साधनों की अहम भूमिका है। इसमें अस्थायी नवीन गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग पर ज्यादा ज़ोर दिया जा रहा है। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आईएन तिवारी का।
डा. तिवारी ने बताया कि जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर सीएचसी मुबारकपुर से स्त्री रोग विशषज्ञ डॉ राजवंती कौशिक और सीएचसी बिलरियागंज से डॉ माया ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) एवं एएनएम को तिमाही गर्भ निरोधक इंजेक्शन अंतरा व साप्ताहिक गर्भ निरोधक गोली छाया के फायदों के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी। महिलाओं को लम्बे समय तक गर्भधारण से बचाव के लिए गर्भनिरोधक साधन अपनाना जरूरी है । स्वास्थ्य विभाग जिला महिला चिकित्सालय सहित समस्त शहरी व ग्रामीण सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा व छाया की सेवा उपलब्ध करा रहा है। इसके लिए सेवा प्रदाताओं एएनएम, सीएचओ, नर्स को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डा. संजय कुमार ने बताया कि बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में आधुनिक गर्भनिरोधक साधन अंतरा इंजेक्शन व छाया साप्ताहिक गोली पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण में बताया गया कि आधुनिक गर्भ निरोधक साधनों में अंतरा व छाया की सुविधा परिवार नियोजन में काफी सहायक साबित हो रही है। अंतरा एक आधुनिक त्रैमासिक गर्भ निरोधक इंजेक्शन है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है। इस विधि को शुरू करने से पहले प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा जांच कराना अत्यंत आवश्यक है।
प्रशिक्षक डा. माया ने बताया कि धात्री महिलाएं प्रसव के छह सप्ताह बाद अंतरा अपना सकती हैं। इससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जो महिलाएं गर्भ निरोधक गोली नहीं खा सकतीं वह इसका इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे यौन संबंध बनाने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी और कुछ मामलों में यह माहवारी के दौरान होने वाली ऐंठन को भी कम करता है। गर्भनिरोधक गोलियां भी महिलाओं द्वारा अपनाया जाने वाले एक अस्थाई विकल्प है। इससे वह अनचाहे गर्भ से सुरक्षित रह सकती हैं।
जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबन्धक विपिन पाठक ने प्रशिक्षण में विशेष सहयोग दिया। उन्होने बताया कि प्रसव के छह सप्ताह बाद, माहवारी शुरू होने के सात दिन के अंदर, गर्भपात होने के तुरंत बाद या सात दिन के अंदर अंतरा इंजेक्शन लगवाना चाहिए। इंजेक्शन लगवाने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए। माहवारी शुरू होने के तुरंत बाद, प्रसव के तुरंत बाद व गर्भपात के तुरंत बाद या सात दिन के अंदर छाया साप्ताहिक गोली का सेवन शुरू करना चाहिए। शुरुआत के तीन महीने सप्ताह में दो बार एवं चौथे महीने से सप्ताह में एक बार सेवन शुरू करना चाहिए।
प्रशिक्षण में जिला परिवार कल्याण एवं रसद प्रबन्धक बबलू यादव तथा तरवा, तहबरपुर, सठियांव, फूलपुर तथा रानी की सराय ब्लॉकों की एएनएम मौजूद थीं।