आजमगढ़, फाइलेरिया की जागरूकता के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

 

• पाथ संस्था के सहयोग से प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

आजमगढ़, 7 सितम्बर 2022
फाइलेरिया एक वेक्टर जनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने होता है। इसे लिम्फोडिमा (हाथी पांव) भी कहा जाता है। यह न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देता है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। लोगों को जागरूक करने के साथ अगर एमडीए अभियान में दवा का सेवन करते रहेंगे, तो इस बीमारी से बच जाएंगे। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आईएन तिवारी का। वह सीएमओ कार्यालय सभागार में आयोजित एक दिवसीय फाइलेरिया जागरूकता प्रशिक्षण सत्र को संबोधित कर रहे थे।
डॉ तिवारी ने बताया कि जनपद में लिम्फोडिमा (हाथी पांव) के 370 मरीज हैं और हाइड्रोसील के 178 मरीज हैं। जनपद में कुल 370 एमएमडीपी किट बांटी गई है।

जिला मलेरिया अधिकारी शेषधर द्विवेदी ने बताया कि शुरू में डॉक्टर की सलाह पर दवा का सेवन किया जाए तो इसका परजीवी नष्ट हो जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एमडीए अभियान चलाया जाता है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर घर जाकर फाइलेरिया की दवा खिलाती हैं। इसके साथ ही घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखने, पानी जमा न होने और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करने के प्रति भी जागरूक किया जाता है।

पाथ संस्था की मंडलीय समन्वयक डॉ जसप्रीत कौर ने बताया कि जनपद में फाइलेरिया की रोकथाम के लिए प्रशिक्षण के बाद ब्लॉक का आवंटन कर दिया गया है। समय-समय पर जिला स्तर के अधिकारी इसकी समीक्षा करेंगे। प्रशिक्षण में फाइलेरिया पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रशिक्षण में वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक, सहायक मलेरिया अधिकारी, मलेरिया निरीक्षक, फाइलेरिया निरीक्षक, जीव वैज्ञानिक, बीसीपीएम तथा समन्वयक प्रदीप मिश्रा सहित कुल 36 लोग उपस्थित थे।