आजमगढ़ 26 अप्रैल 2026
आजमगढ़ जनपद के ग्राम बिठ्ठलपुर, पोस्ट ऊंचा गांव, ब्लॉक पल्हनी के निवासी हिमांशु गिरी ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी कमी सफलता के रास्ते में दीवार नहीं बन सकती।
पिता श्री संजय गिरी (ऑटो ड्राइवर) और माता श्रीमती मन्जू देवी (गृहिणी) के पुत्र हिमांशु गिरी जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं। लेकिन इस चुनौती को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी लगन और ईमानदारी से जारी रखी।
हिमांशु ने हाईस्कूल परीक्षा में 86.83% अंक प्राप्त कर अपने माता-पिता और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि शारीरिक बाधाएं कभी भी सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकतीं, यदि मन में दृढ़ संकल्प और मेहनत का जज़्बा हो।
वर्तमान में हिमांशु गिरी लखनऊ स्थित स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज, मोहान रोड में अध्ययनरत हैं। उनकी सफलता के पीछे उनके पिता का निरंतर प्रोत्साहन और उत्साहवर्धन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
पढ़ाई के साथ-साथ हिमांशु शतरंज और ब्लाइंड क्रिकेट जैसे खेलों में भी सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, जो उनके आत्मविश्वास और बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
हिमांशु गिरी की यह प्रेरणादायक कहानी समाज के लिए एक संदेश है कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सच्ची मेहनत और मजबूत इरादों के सामने वे छोटी पड़ जाती हैं।






