*TV 20 NEWS || AZAMGARH :जिलाधिकारी द्वारा सोशल मोबिलाइजेशन अभियान चलाकर मात्र 3 माह में 5650 समूह गठित कर 94 हजार महिला सदस्यों को जोड़ा गया*

जिलाधिकारी द्वारा सोशल मोबिलाइजेशन अभियान चलाकर मात्र 3 माह में 5650 समूह गठित कर 94 हजार महिला सदस्यों को जोड़ा गया

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हाथों मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आर्थिक सशक्तिकरण एवं उद्यमशीलता की नई पहचान बनीं समूह दीदियां- जिलाधिकारी

मातृ शक्ति के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आएगा बहुत बड़ा बदलाव- जिलाधिकारी

सोशल मोबिलाइजेशन अभियान में 6000 समूहों का गठन कर प्रदेश में तीसरे स्थान पर आजमगढ़

आजमगढ़, 21 अगस्त, 2026//

मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में महिला स्वावलंबन, आर्थिक सशक्तिकरण एवं उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए जनपद आजमगढ़ में महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के कुशल निर्देशन में स्वयं सहायता समूह की दीदियां न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ ही महिला नेतृत्व वाले विभिन्न अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में परिवार संतृप्तिकरण एवं सोशल मोबिलाइजेशन अभियान को मिशन मोड में संचालित किया गया। अभियान के पहले अप्रैल 2026 तक जहां मात्र 350 समूह में लगभग 6000 महिला जुड़ी थी, तो वहीं डीएम के प्रभावी व सतत् निर्देशन में मात्र 03 महीने में (मई, जून, जुलाई 2026) यह संख्या बढ़कर 6000 समूह में 1 लाख महिलाओं तक पहुंच गया। अर्थात् सोशल मोबिलाइजेशन अभियान के अन्तर्गत लगभग 5650 समूह तथा 94000 महिला सदस्य बढ़ी।

अब तक लगभग 25 हजार समूहों से जुड़ीं 3 लाख महिलाएं

वर्तमान में जनपद आजमगढ़ में लगभग 25 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों से 3 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। समूह की दीदियां लाइवलीहुड ऑन व्हील्स, पिंक प्रेरणा कैंटीन, गो-धन संकल्प, वर्मी कम्पोस्ट, कृषि सखी, बैंक सखी, विद्युत सखी, स्वास्थ्य सखी, बीमा सखी, आपदा सखी एवं शक्ति सखी सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमशीलता की नई पहचान बना रही हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप जनपद में 1 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वयं सहायता समूह केवल आर्थिक गतिविधियों का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को निर्णय लेने, नेतृत्व करने और सामाजिक बदलाव का वाहक बनने का अवसर भी प्रदान कर रहे हैं।

स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक आधार प्रदान कर रही विभिन्न निधियां
राष्ट्रीय/राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य ग्रामीण निर्धन परिवारों की महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्थायी संस्थाओं के माध्यम से आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना और गरीबी को कम करना है। इसके अंतर्गत पात्र महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। समूह गठन के बाद स्टार्टअप फण्ड के रूप में 2500 रुपये समूह के खाते में उपलब्ध कराए जाते हैं। समूह गठन के तीन माह बाद रिवाल्विंग फण्ड के रूप में 30 हजार रुपये दिए जाते हैं। समूह गठन के छह माह पश्चात कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फण्ड (सीआईएफ) के रूप में 1.50 लाख रुपये सीएलएफ एवं नोडल ग्राम संगठन के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। इसी प्रकार कृषि आजीविका कार्यों के लिए ग्राम संगठनों को 2 लाख रुपये का लाइवलीहुड फण्ड उपलब्ध कराया जाता है। जोखिम निवारण के लिए वल्नरेबिलिटी रिडक्शन फण्ड (वीआरएफ) के माध्यम से प्राकृतिक आपदा, बीमारी, भुखमरी, मृत्यु अथवा अन्य जोखिम की परिस्थितियों में समूह सदस्यों को सहायता प्रदान की जाती है।

बैंक क्रेडिट लिंकेज से उद्यम विस्तार को मिल रहा आधार

समूह गठन के छह माह बाद बैंक क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से प्रथम डोज के रूप में 1.50 लाख रुपये तक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। समूहों के लिए स्वीकृत ऋण सीमा अधिकतम 6 लाख रुपये तक है। ब्याज अनुदान के माध्यम से प्रदेश के पिछड़े जनपदों में 3 लाख रुपये तक का ऋण 7 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है तथा समय से ऋण की अदायगी करने पर अतिरिक्त ब्याज छूट का भी प्राविधान है। इस व्यवस्था से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं छोटे व्यवसायों, कृषि आधारित गतिविधियों, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई तथा अन्य स्थानीय उद्यमों को आगे बढ़ाकर अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं।

सोशल मोबिलाइजेशन अभियान में आजमगढ़ की उल्लेखनीय प्रगति

जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में परिवार संतृप्तिकरण एवं सोशल मोबिलाइजेशन अभियान को मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है। अभियान के पहले अप्रैल 2026 तक जहां पर मात्र 350 समूह में लगभग 6000 महिला जुड़ी थी, तो वहीं डीएम के प्रभावी निर्देशन में मात्र 03 महीने में (मई, जून, जुलाई 2026) यह संख्या बढ़कर 6000 समूह में 1 लाख महिलाओं तक पहुंच गया। अर्थात् सोशल मोबिलाइजेशन अभियान के अन्तर्गत लगभग 5650 समूह तथा 94000 महिला सदस्य बढ़ी।

जनपद की 1810 ग्राम पंचायतों में प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए दो समूह सखी, कुल 3620 समूह सखियों का चयन कर हरिऔध कला केन्द्र, आजमगढ़ में उनका उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कराया गया। विकास खण्ड स्तर पर सहायक विकास अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित करते हुए समूह सखी, आईसीआरपी एवं अन्य कैडर/सखी के माध्यम से पंचायतवार डोर-टू-डोर अभियान चलाया जा रहा है। पात्र परिवारों को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लाभों की जानकारी देकर उन्हें समूहों से जोड़ा जा रहा है। डीएम द्वारा सतत बैठकों में दिये गये निर्देश एवं स्थलीय निरीक्षण के परिणामस्वरूप सोशल मोबिलाइजेशन अभियान के तहत अब तक 6000 समूहों का गठन कर सीएम डैशबोर्ड पर प्रदेश में आजमगढ़ तीसरे स्थान पर है। अवशेष लक्ष्य की पूर्ति के लिए पात्र परिवारों को शत-प्रतिशत स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने हेतु अभियान निरंतर जारी है।

250 पिंक प्रेरणा दीदी कैंटीन/फास्ट फूड सेंटर बनीं महिला उद्यमिता की पहचान
मा0 मुख्यमंत्री की मंशा एवं जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के निर्देशन में ‘‘स्वावलंबन अभियान’’ के अंतर्गत जनपद में अभिनव पहल करते हुए लाइवलीहुड ऑन व्हील्स के माध्यम से 250 पिंक प्रेरणा दीदी कैंटीन/फास्ट फूड सेंटर की शुरुआत की गई है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अनुदान के माध्यम से आधुनिक ठेले उपलब्ध कराकर उन्हें स्थानीय बाजार में अपना उद्यम स्थापित करने का अवसर दिया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रदेश स्तर पर यह एक अभिनव प्रयोग है, जिसके माध्यम से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराते हुए उन्हें लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मुख्यधारा के व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। पिंक प्रेरणा दीदी कैंटीन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण खाद्य सेवाओं की उपलब्धता का भी माध्यम बन रही हैं।

गो-धन संकल्प से वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन और महिलाओं की अतिरिक्त आय

मा0 मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप जनपद में ‘‘गो-धन संकल्प अभियान’’ प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य गौशालाओं के गोबर का उचित निस्तारण, उसका आर्थिक मूल्य सुनिश्चित करना, जैविक खेती को बढ़ावा देना तथा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आय का अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में पंचायती राज, राजस्व एवं विकास विभागों को कुल 27,13,713 पौधरोपण का लक्ष्य प्राप्त हुआ। प्रत्येक पौधे के लिए 1 किलोग्राम की दर से 27,13,713 किलोग्राम वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कराया गया। इसका सम्पूर्ण उत्पादन एवं आपूर्ति स्वयं सहायता समूहों द्वारा की गई।

जनपद की स्थायी एवं अस्थायी गौशालाओं को स्वयं सहायता समूहों से मैप करते हुए गोबर का 50 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से क्रय किया गया तथा उससे वर्मी कम्पोस्ट तैयार कराया गया। समूहों द्वारा उत्पादित वर्मी कम्पोस्ट को 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराया गया और भुगतान सीधे समूहों के खाते में किया गया। इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को लगभग 2 करोड़ 71 लाख रुपये की अतिरिक्त आय का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 1 करोड़ 12 लाख का भुगतान हुआ है, जबकि गौशालाओं को भी लगभग 12.30 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि गो-धन संकल्प अभियान पर्यावरण संरक्षण, गौशाला प्रबंधन, जैविक खेती एवं महिला आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने का प्रभावी उदाहरण है।

आपदा सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा रही हैं आपदा प्रबंधन की जागरूकता

मानसून एवं संभावित बाढ़ की परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता के लिए आपदा सखियों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की है। हरैया, महाराजगंज एवं अजमतगढ़ विकास खण्डों में तैनात 60 आपदा सखियां गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को आपदा प्रबंधन एवं बचाव के उपायों की जानकारी दे रही हैं। प्रशिक्षित आपदा सखियां बाढ़ की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने, राहत शिविरों, प्राथमिक उपचार, आपातकालीन संपर्क नंबरों तथा बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों की सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी दे रही हैं। जलभराव, विद्युत दुर्घटनाओं एवं दूषित पानी से होने वाली बीमारियों के प्रति भी ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं को आपदा प्रबंधन से जोड़ने से जागरूकता अभियान अधिक प्रभावी होगा तथा आपदा की स्थिति में जनहानि और नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

हर घर तिरंगा अभियान में समूह दीदियों ने तैयार किए 3.5 लाख तिरंगे

मा0 प्रधानमंत्री एवं मा0 मुख्यमंत्री के आह्वान पर ‘‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’’ को सफल बनाने में भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने उल्लेखनीय योगदान दिया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से जुड़ी समूह दीदियों द्वारा 3.5 लाख तिरंगा झण्डों का निर्माण किया गया। प्रति झण्डा 20 रुपये की दर से कुल 70 लाख रुपये का भुगतान महिला समूहों को किया गया। इस प्रकार देशभक्ति से जुड़े अभियान में सहभागिता के साथ ही महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का अवसर भी मिला। समूह की महिलाओं ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज तैयार करना उनके लिए केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा और देशभक्ति से जुड़ने का गौरवपूर्ण अवसर भी है।

समूह दीदियों द्वारा बनाई गयी राखियांे से सजेगी भाइयों की कलाई
ग्रामीण आजीविका मिशन की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा विभिन्न रंगों एवं डिजाइनों की आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं, जो भाइयों की कलाइयों को सजायेंगी। प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं द्वारा तैयार की गयी राखियां बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध है। इनमें पारम्परिक डिजाइन के साथ ही रंग-बिरंगे धागों, मोतियों और अन्य सजावटी सामग्री का प्रयोग किया गया है। डीसी एनआरएलएम डॉ0 आराधना त्रिपाठी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर तैयार कर राखियों की बिक्री से महिलाओं को अपने उत्पाद की पहचान बनाने का भी मौका मिलेगा।

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मिलेगा पात्र गृहस्थी का लाभ
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को पात्र गृहस्थी योजना से जोड़ने की पहल की गयी है। इससे महिलाओं को समूह की गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्वरोजगार के लिए अवसर उपलब्ध कराना है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनपद आजमगढ़ में लगभग 5 लाख महिलाओं को समूह से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए जिले में 30218 स्वयं सहायता समूहों के गठन का लक्ष्य है। अभियान में पात्र गृहस्थी और अन्त्योदय परिवार की महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पात्र गृहस्थी योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं को खाद्य एवं रसद विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। समूह से जोड़ने के साथ ही महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष के 4 माह में अब तक 4256 स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है, जिसमें लगभग 75 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं।

शक्ति सखी के रूप में सामाजिक नेतृत्व की नई भूमिका

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ सामाजिक नेतृत्व की भूमिका में आगे लाने के लिए एनआरएलएम के अंतर्गत समूह की महिलाओं को ‘‘शक्ति सखी’’ के रूप में नई जिम्मेदारी दी गई है। जनपद के सभी विकास खण्डों में समूहों के बीच से चयनित महिलाओं को शक्ति सखी बनाया गया है। शक्ति सखियां महिलाओं की समस्याएं सुनकर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराती हैं तथा संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर समस्याओं के समाधान में सहयोग करती हैं। चयनित शक्ति सखियों को प्रति माह 6000 रुपये मानदेय सहित 1500 रू0 यात्रा भत्ता के रूप में भी दिया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की दीदियां अब केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार और परिवर्तन की नेतृत्वकर्ता बन रही हैं। कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, कैंटीन संचालन, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन, बैंकिंग, बीमा, विद्युत, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन एवं सामाजिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। उन्होंने कहा कि ‘‘मातृ शक्ति के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।’’ आजमगढ़ की महिला स्वयं सहायता समूह की दीदियां प्रधानमंत्री जी के ‘‘शक्ति की सप्त धारा’’ के संकल्प को जमीन पर उतारते हुए आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार और महिला नेतृत्व की नई मिसाल स्थापित कर रही हैं। प्रशासन का प्रयास है कि पात्र परिवारों की महिलाओं को शत-प्रतिशत स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए और उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार तथा उद्यम के अवसर उपलब्ध कराकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों की दीदियों से आह्वान किया कि वे सरकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाकर स्वयं आत्मनिर्भर बनें और अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त एवं स्वावलंबी बनाने में सहयोग करें।