छात्रा बोली- लग रहा है डर, सेना के कब्जे में बाजार
आजमगढ़। यूक्रेन के ओड़िसा नेशनल मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने वाली आजमगढ़ की छात्रा यूक्रेन में फंस गई है। रेनू यादव सगड़ी तहसील के खतीबपुर गांव की रहने वाली हैं। रेनू के भाई डॉक्टर सत्यशील यादव ने बताया कि बहन से बात हुई तो वो बहुत डरी हुई है। बाजार व सड़कों पर सेना का कब्जा है और दुकानों पर लंबी लाइन लग रही है। अभी तक जिले के पांच स्टूडेंट के फंसे होने की जानकारी आ रही है। इनमें उज्जवल श्रीवास्तव, हीरापट्टी, श्रेया यादव थाना सरायमीर, विनीत कुमार विश्वकर्मा व अवनीश यादव हैं। बता दें कि रेनू यादव एमबीबीएस फोर्थ सेमेस्टर की छात्रा है। जंग छिड़ने और धमाकों के कारण बहुत डरी हुई है। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द एयरलिफ्ट कराकर यूक्रेन में फंसे भारत के बच्चों को जल्द भारत लाना चाहिए।
डॉक्टर सत्यशील यादव का कहना है कि अमेरिका ने अपने यहां के लोगों को 20 दिन पहले ही बुला लिया। भारत ने मामले में देरी की, जिसके कारण यहां के बड़ी संख्या में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट फंस गए हैं। भाई सत्यशील का कहना है कि दूतावास से एडवाइजरी जारी की गई थी पर सभी को एयरलिफ्ट कराया जाएगा। अभी तक नहीं कराया गया। वहां के हालात लगातार खराब हो रहे हैं, ऐसे में हम लोग बहुत डरे हुए हैं। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रही आजमगढ़ की छात्रा के भाई डा. सत्यशील यादव ने बताया कि यूक्रेन के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। इस बारे में घर के सदस्यों को कोई जानकारी इसलिए नहीं दे रहा, क्योंकि नहीं तो परेशान हो जाएंगे। रेनू यादव के पिता डा. नरेन्द्र यादव भी जिले में डॉक्टर हैं। पूरा इलाका सेना के कब्जे में है। डॉ. सत्यशील का कहना है कि बड़ी संख्या में स्टूडेंट यूक्रेन में फंसे हैं। रेनू यादव ने वीडियो कॉल कर अपने भाई को बताया कि स्टोर में लगातार भीड़ बढ़ रही है। लम्बी-लम्बी लाइनें लग रही हैं। हम लोगों के भी राशन खत्म हो रहे हैं। ऐसे में हम लोगों को काफी समस्या हो रही है। लगातार धमाकों की आवाज सुनाई दे रही है। यूक्रेन में फंसी जिले की छात्रा रेनू यादव ने अपने भाई डा. सत्यशील से बात करते हुए बताया कि दूतावास की तरफ से एक फ्लाइट भेजी गई जबकि यहां 20 हजार से अधिक स्टूडेंट फंसे हैं। फ्लाइट का किराया एक लाख 80 हजार से अधिक हो गया है। छात्रा रेनू यादव ने 26 फरवरी के लिए कतर एयरलाइंस से टिकट बुक कराया था पर युद्ध के हालात के कारण फ्लाइट कैंसिल हो गई।
विनीत कुमार विश्वकर्मा के पिता अनिल विश्वकर्मा का कहना है कि यूक्रेन में युद्ध जैसे हालात हैं। ऐसे में हमारी सरकार से विनती है कि जल्द से जल्द एयरलिफ्ट कराकर लाया जाय। हम लोगों के परिवार के लोग डरे हुए हैं और दहशत में जीने को मजबूर हैं। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द और अधिक फ्लाइट भेजकर सभी स्टूडेंट को एयरलिफ्ट कराना चाहिए, जिससे सभी अपने घरों को आ सकें। भारत की तुलना में यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई बहुत सस्ती है। इसलिए यूपी के कई शहरों के छात्र हर साल वहां जाते हैं।






