आजमगढ़ जिले के दौरे पर एक दिन पूर्व आए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों से मुलाकात विधान परिषद चुनाव की रणनीति बनाई। जिले के बाहुबली सपा विधायक रमाकांत यादव अखिलेश यादव के साथ फ्रेम में नजर आए। इसके पीछे का तर्क यह है कि भाजपा ने विधान परिषद चुनाव में रमाकांत यादव के बेटे अरूणकांत यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि समाजवादी पार्टी ने अपने पुराने सहयोगी राकेश यादव गुड्डू पर दांव आजमाया है। ऐसे में विधान परिषद के चुनाव में यह सीट सपा के ही खाते में जाए इसको लेकर जिले के विधायकों के साथ अखिलेश यादव ने बैठक कर सभी को जिम्मेदारी सौंपी, जिससे आजमगढ-मऊ की सीट पर सपा चुनाव जीत सके।
रमाकांत यादव ने दिया था रेफरी वाला बयान
दो दिन पूर्व सपा विधायक रमाकांत यादव ने बयान दिया था कि सपा व भाजपा के जो प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, वह दोनों मेरे बेटे हैं। ऐसे में हम किसी का प्रचार नहीं करेगें, जनता इसका निर्णय करेगी। रमाकांत यादव का बयान सोशल मीडिया में जमकर वायरल भी हुआ। वहीं रमाकांत यादव के बेटे व भाजपा प्रत्याशी अरूणकांत यादव का कहना है कि हम लोगों की वैचारिक लड़ाई है, हम लोगों में कोई दुश्मनी थोड़े है। हम दोनो लोग एक ही घर में रहते हैं।
सपा के वोटों को तोड़ने की साजिश
इस बारे में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष हवलदार यादव का कहना है कि जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर सपा जीती है। ऐसे में अखिलेशह यादव जनता का धन्यवाद करने आए थे। जिले की जनता का स्नहे है। सपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि यहां से भाजपा ने जो यादव प्रत्याशी उतारा है, असली निशाना तो वह एमएलसी जसवंत सिंह का बेटा रिषू है। यह तो केवल सपा के वोटों को तोड़ने की साजिश है पर ऐसा हो नहीं पाएगा।






