TV 20 NEWS || LUCKNOW : त्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ के गठन को कैबिनेट की मंजूरी उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ के गठन को कैबिनेट की मंजूरी
उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का जताया आभार, कहा— “यह निर्णय सामाजिक न्याय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण।”
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उपमुख्यमंत्री, श्री केशव प्रसाद मौर्य जी
लखनऊ। लखनऊ: 18 मई, 2026, उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी के सतत प्रयासों और दूरदर्शी दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप आज मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ के गठन के प्रस्ताव को सहर्ष अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पिछड़े वर्ग के नागरिकों को स्थानीय निकायों में उनका हक और उचित प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में इसे एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
न्यायसंगत प्रतिनिधित्व और ‘ट्रिपल टेस्ट’ की कसौटी
श्री मौर्य ने कहा कि ग्रामीण स्थानीय निकायों (त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था) में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को पूरी तरह वैधानिक, पारदर्शी और तथ्य-आधारित बनाने के लिए इस समर्पित आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग राज्य के ग्रामीण अंचलों में पिछड़ेपन की प्रकृति और निहितार्थों की गहन जांच करेगा। इसके साथ ही, स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग के लिए सीटों के आरक्षण की आवश्यकता और आनुपातिकता का सटीक आकलन करने के लिए आवश्यक आंकड़े जुटाएगा।
उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शिता और पिछडों के उत्थाान पर अपना ध्यापन आकर्षित किये जाने पर प्रति कोटि-कोटि आभार प्रकट किया है, हमारी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र पर कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के हमारे पिछड़े, शोषित और वंचित भाई-बहनों को राजनैतिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ‘उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ का गठन अंत्योदय और सामाजिक न्याय के प्रति भाजपा सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का जीता-जागता प्रमाण है। इस निर्णय से ग्रामीण लोकतंत्र में पिछड़ों की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी।
आयोग की मुख्य भूमिका और कार्यक्षेत्र:
• सटीक सर्वेक्षण: आयोग ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़े वर्ग की आबादी और उनके प्रतिनिधित्व की स्थिति का प्रामाणिक डेटा एकत्र करेगा।
• आरक्षण की अनुशंसा: एकत्रित आंकड़ों के आधार पर स्थानीय ग्रामीण निकायों (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत) में ओबीसी आरक्षण की न्यायसंगत सीमा तय करने की सिफारिश करेगा।
• पारदर्शिता सुनिश्चित करना: यह कदम भविष्य में होने वाले स्थानीय ग्रामीण निकाय चुनावों को किसी भी प्रकार के कानूनी व्यवधान से बचाएगा और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा।
अंत में श्री मौर्य जी ने कहा कि आयोग के गठन से न केवल ग्रामीण स्तर पर नेतृत्व के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि विकास की मुख्यधारा से दूर रह गए वर्गों को शासन-प्रशासन में अपनी आवाज बुलंद करने का वास्तविक अधिकार मिलेगा।






