ज्यूरिस्ट्स फेडरेशन पूरे भारत में खोलेगा विधिक सहायता एवं प्रो-बोनो केंद्र
नई दिल्ली (न्यूज़ वार्ता):
ज्यूरिस्ट्स फेडरेशन ने देशभर में विधिक सहायता एवं प्रो-बोनो केंद्र स्थापित करने की महत्वपूर्ण जनसेवा पहल की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों तक प्रारंभिक कानूनी जानकारी, विधिक मार्गदर्शन और उपलब्ध कानूनी उपायों से संबंधित जानकारी को अधिक सुलभ बनाना है। फेडरेशन इस नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की दिशा में कार्य करेगा और प्रस्तावित केंद्र विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यकता एवं संगठनात्मक क्षमता के अनुसार स्थापित किए जाएंगे।
इस संबंध में जानकारी देते हुए ज्यूरिस्ट्स फेडरेशन के चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था के प्रति जागरूकता केवल न्यायालयों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों, कर्तव्यों और उपलब्ध कानूनी विकल्पों की बुनियादी जानकारी होना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधिक सहायता एवं प्रो-बोनो केंद्रों के माध्यम से जनता और कानूनी क्षेत्र के बीच एक उपयोगी एवं जिम्मेदार संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
इन केंद्रों पर आम नागरिकों को प्रारंभिक स्तर पर कानूनी प्रक्रियाओं को समझने, संबंधित विषय में उपलब्ध उपायों की जानकारी प्राप्त करने तथा आवश्यकता के अनुसार उचित कानूनी या संस्थागत माध्यम तक पहुंचने के संबंध में मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इसका विशेष उद्देश्य उन लोगों तक जानकारी पहुंचाना है जिन्हें अपने कानूनी अधिकारों, संबंधित प्राधिकरण या न्यायालय के समक्ष अपनाई जाने वाली प्रक्रिया अथवा उपलब्ध सहायता के विकल्पों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती।
फेडरेशन के अनुसार, प्रस्तावित केंद्र प्रो-बोनो एवं स्वैच्छिक आधार पर कार्य करेंगे और उनकी गतिविधियां लागू कानूनों, पेशेवर नियमों तथा संबंधित नियामक आवश्यकताओं के अधीन होंगी। इस पहल से जुड़ने वाले अधिवक्ता अपनी इच्छा और उपलब्ध समय के अनुसार अपने ज्ञान एवं अनुभव का स्वैच्छिक योगदान कर सकेंगे।
ज्यूरिस्ट्स फेडरेशन का मानना है कि कानूनी जागरूकता एक जिम्मेदार समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई बार जानकारी के अभाव में लोग अपने अधिकारों का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाते या यह समझ नहीं पाते कि किसी समस्या के समाधान के लिए उन्हें किस प्राधिकरण, संस्था या कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए। प्रस्तावित केंद्र इस सूचना-अंतर को कम करने की दिशा में एक सहयोगी मंच के रूप में कार्य करने का प्रयास करेंगे।
फेडरेशन ने देशभर के अधिवक्ताओं तथा जनसेवा की भावना रखने वाले नागरिकों से भी इस पहल से जुड़ने का आह्वान किया है। अधिवक्ता अपनी विशेषज्ञता के अनुसार विधिक सहायता और प्रो-बोनो गतिविधियों में योगदान दे सकते हैं, जबकि अन्य इच्छुक नागरिक कानूनी जागरूकता, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में अपनी क्षमता एवं अनुभव के अनुसार सहयोग कर सकते हैं।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित केंद्र किसी न्यायालय, सरकारी विभाग, वैधानिक कानूनी सहायता संस्था या अन्य विधि द्वारा स्थापित प्राधिकरण के कार्यों का स्थान लेने के उद्देश्य से स्थापित नहीं किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य मौजूदा कानूनी एवं संस्थागत व्यवस्थाओं के पूरक के रूप में कार्य करते हुए नागरिकों को उपलब्ध विकल्पों को समझने और आवश्यकता पड़ने पर उचित संस्थागत माध्यम तक पहुंचने में सहायता करना है।
इसी क्रम में ज्यूरिस्ट्स फेडरेशन ने अपने देशव्यापी मानद पदों एवं जिम्मेदारियों के लिए भी अधिवक्ताओं और इच्छुक नागरिकों को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है। ये जिम्मेदारियां पूरे भारत में, तालुका स्तर तक, स्वैच्छिक एवं प्रो-बोनो प्रकृति की होंगी। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि इन मानद पदों के लिए कोई वेतन, पारिश्रमिक अथवा मौद्रिक मुआवजा प्रदान नहीं किया जाएगा।
चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि जनसेवा के लिए केवल संस्थागत प्रयास ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि समाज के जिम्मेदार नागरिकों और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों की स्वैच्छिक भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का प्रयास ऐसा नेटवर्क विकसित करना है जिसमें कानूनी ज्ञान और सामाजिक जिम्मेदारी को जनहित से जोड़ा जा सके।
उन्होंने अधिवक्ताओं और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्ध नागरिकों से अपील की कि जो लोग बिना किसी आर्थिक अपेक्षा के समाज के लिए अपना समय, ज्ञान और अनुभव देना चाहते हैं, वे इस पहल से जुड़ सकते हैं।
ज्यूरिस्ट्स फेडरेशन के अनुसार, विधिक सहायता एवं प्रो-बोनो केंद्रों की स्थापना चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। विभिन्न क्षेत्रों में केंद्रों के स्थान, प्रारंभ होने की तिथि, संचालन प्रक्रिया, उपलब्ध सेवाओं और सहभागिता से संबंधित विस्तृत जानकारी समय-समय पर जारी की जाएगी।
फेडरेशन ने कहा कि इस पहल का मूल उद्देश्य कानूनी जागरूकता को व्यापक बनाना, नागरिकों को उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जानकारी देना और स्वैच्छिक विधिक सेवा के माध्यम से समाज तथा कानूनी पेशे के बीच सार्थक संबंध को मजबूत करना है।






