*TV 20 NEWS || बिना ड्राइविंग लाइसेंस बेटे को बाइक देना पिता को पड़ा भारी, कोर्ट ने सुनाई 3 महीने की सजा; बेटे को 5 साल का कारावास*

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बिना ड्राइविंग लाइसेंस के बाइक चलाने और सड़क हादसे में एक युवक की मौत के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। दुर्ग की सत्र अदालत ने नाबालिग उम्र में बाइक चला रहे बेटे के साथ-साथ उसे बाइक देने वाले पिता को भी दोषी ठहराया है। अदालत ने बेटे को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, जबकि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के उसे बाइक चलाने की अनुमति देने पर पिता को तीन महीने के कारावास की सजा दी गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 4 अगस्त 2025 की रात करीब 8:30 बजे की है। दुर्ग के स्मृतिनगर चौकी क्षेत्र के कोहका स्थित इंदु आईटीआई स्कूल के पास यह हादसा हुआ था। अभियोजन के मुताबिक, आरोपी मोहित कुमार बाहेल तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चला रहा था। इसी दौरान विपरीत दिशा से आ रही एक एक्टिवा से उसकी जोरदार टक्कर हो गई।

हादसे में एक्टिवा सवार शादान अली की मौत हो गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के समय आरोपी की उम्र करीब 18 वर्ष बताई गई है। जांच में सामने आया कि मोहित के पास बाइक चलाने का वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।

पिता को क्यों मिली सजा?

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में साबित किया कि मोहित के पिता मोहन लाल ने बेटे को बिना ड्राइविंग लाइसेंस के बाइक दी थी। अदालत ने माना कि वाहन मालिक की भी जिम्मेदारी है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति को वाहन न सौंपे, जिसके पास संबंधित श्रेणी का वैध ड्राइविंग लाइसेंस न हो।

इसी आधार पर सत्र न्यायाधीश विनोद कुंजूर की अदालत ने बेटे मोहित कुमार बाहेल को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं, पिता मोहन लाल को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 5 के उल्लंघन का दोषी मानते हुए तीन महीने के कारावास की सजा दी गई।

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 5 में क्या है प्रावधान?

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 5 के अनुसार, वाहन का मालिक या जिम्मेदार व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को वाहन चलाने की अनुमति नहीं दे सकता, जिसके पास उस वाहन को चलाने के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस न हो। इस नियम का उल्लंघन करने पर वाहन मालिक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके तहत जुर्माने के साथ कारावास का भी प्रावधान है।

अभिभावकों के लिए अहम संदेश

अदालत के इस फैसले ने अभिभावकों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया है। बच्चों को बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बाइक या कार देना न केवल उनकी, बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की जिंदगी के लिए भी खतरा बन सकता है। लापरवाही से हुई दुर्घटना में वाहन चलाने वाले के साथ वाहन उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को भी कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।