आजमगढ़ : प्रजनन अंगों में संक्रमण से हो सकती है गंभीर बीमारी,  बिना यौन संपर्क के भी हो सकता है संक्रमण

• सुरक्षा क्लीनिक में लें मुफ्त जानकारी, दूर करें बीमारी
आजमगढ़, 23 जनवरी 2022
प्रजनन तंत्र संक्रमण तथा यौन संचारित संक्रमण (आर.टी.आई./एस.टी.आई.) प्रजनन प्रणाली में होने वाले संक्रमण को कहते हैं जिनमें यौन संचारित संक्रमण (एस.टी.आई) तथा प्रजनन तंत्र के अन्य संक्रमण (बिना यौन संपर्क के होने वाले) शामिल हैं। ये संक्रमण बैक्टीरिया की अधिकता के परिणामस्वरूप हो सकते हैं, जो सामान्य रूप से जननांगों में रहते हैं। आर.टी.आई. महिलाओं और पुरुषों दोनों को प्रभावित करते हैं। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आईएन तिवारी का।
डॉ तिवारी ने बताया कि महिलाओं में यौन संचारित संक्रमण के होने की अधिक संभावना होती है। इनके कारण महिलाओं में जटिलतायें अधिक गंभीर हो सकती हैं और गर्भवती महिला की संतानों में भी संक्रमण हो सकता है।
मंडलीय जिला चिकित्सालय में तैनात चर्म एवं गुप्त रोग विशेषज्ञ डॉ पूनम कुमारी ने बताया कि प्रजनन तन्त्र संक्रमण जनन मार्ग का संक्रमण होता है। यह संक्रमण महिला के जननांग, सर्विक्स, गर्भाशय, फेलोपियन ट्यूब तथा अण्डाशय को प्रभावित करता है। गर्भाशय तथा फेलोपियन ट्यूब का संक्रमण पेल्विक इन्फ्लामेटरी बीमारी (पीआईडी) कहलाता है। पीआईडी के कारण बांझपन और एक्टोपिक प्रेगनेन्सी भी हो सकती है। जबकि एसटीआई बैक्टीरिया, वायरस, या प्रोटोजोआ के कारण होता है जो यौन संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे में जाते हैं।
आर.टी.आई. तथा एस.टी.आई. संक्रमण शरीर में पाये जाने वाले कीटाणुओं, औजारों/दस्तानों से, असुरक्षित गर्भपात के कारण तथा असुरक्षित संभोग द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। प्रजनन तंत्र संक्रमण (आरटीआई) प्रजनन तन्त्र में होने वाली सभी संक्रमणों को कहते हैं चाहे वह यौन क्रियाओं से फैले हो अथवा नहीं।
आर.टी.आई. तथा एस.टी.आई. के लक्षण-
पुरुषों में –
• पेशाब करते समय जलन व दर्द
• बार-बार पेशाब आना
• मूत्र मार्ग से पीले या सफेद रंग का साथ आना
• अंडकोश में सूजन और दर्द
महिलाओं में-
• योनि से श्राव (सफ़ेद या बदबूदार)
• अनियमित माहवारी
• बहुत ज्यादा या अनियमित रक्तस्राव
• माहवारी के दौरान दर्द
• पीठ/कमर/पेडू में दर्द
• जननांगो में खुजली और जलन
आरटीआई/एसटीआई का उपचार न करने का दुष्परिणाम एच.आई.वी. संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है।
आरटीआई/एसटीआई की रोकथाम-
प्रजनन अंगों की स्वच्छता रखना अनिवार्य है। लड़कियों को माहवारी के दौरान स्वच्छता रखनी चाहिए। साफ कपड़े या पैड का इस्तेमाल करना चाहिए। अंदर के कपड़े नियमित रूप से बदलने चाहिए। महिलाओं को सुरक्षित यौन व्यवहार करना चाहिये। साथी के प्रति वफादार रहना चाहिये तथा सुरक्षित यौन क्रिया- संभोग के दौरान कण्डोम का प्रयोग जरूर करना चाहिये। यदि दोनों में से किसी एक को भी एसटीआई हो तो असुरक्षित यौन संबन्ध न बनायें तथा सतर्क रहें।
यहाँ लें मुफ्त परामर्श तथा दवा-
मंडलीय जिला चिकित्सालय में ही तैनात प्रजनन तंत्र संक्रमण तथा यौन संचारित संक्रमण की परामर्शदाता माया सिंह ने बताया कि चिकित्सालय में सरकार की तरफ से वर्ष 2013 से ही सुरक्षा क्लीनिक का प्रावधान किया गया है। जिसके अंतर्गत महिलाओं को प्रजनन तंत्र संक्रमण तथा यौन सचारित संक्रमण के बारे में परामर्श दिया जाता है। इस क्रम में अक्टूबर माह में 1251 लोगों को, जिसमें 529 पुरुषों, 663 महिलाओं तथा 59 ट्रान्स जेंडर को, नवम्बर माह में 1267 लोगों को, जिसमें 653 पुरुषों, 559 महिलाओं तथा 55 ट्रान्स जेंडर तथा दिसम्बर माह में 1484 लोगों को, जिसमें 693 पुरुषों, 697 महिलाओं तथा 94 ट्रान्स जेंडर को परामर्श दिया गया।
कंधरापुर, गाँव लेथूपुर निवासी 31 वर्षीय दिलीप कनौजिया ने बताया की मुझे प्रजनन अंग में संक्रमण हो गया था। मैंने मंडलीय जिला चिकित्सालय में डाक्टर को दिखाया, तो उन्होने माया सिंह के पास परामर्श के लिए भेजा। उन्होने परामर्श के साथ सुरक्षा क्लीनिक से निःशुल्क दवाएं भी दी। मुझे पहले से काफी आराम है।
कंधरापुर निवासी 26 वर्षीय सिंधू ने बताया कि मुझे प्रजनन अंग से श्राव की शिकायत थी, मैंने डाक्टर को दिखाया और परामर्श के अनुसार सुरक्षा क्लीनिक से निःशुल्क दवा ली। पहले की अपेक्षा अब मैं ठीक हूँ।