*TV20 NEWS|| PRAYAGRAJ :कथित Sexual Exploitation मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक, अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, 1 घंटे चली सुनवाई*

कथित Sexual Exploitation मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक, अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, 1 घंटे चली सुनवाई

कथित Sexual Exploitation मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक, अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, 1 घंटे चली सुनवाई

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो नाबालिग बटुकों के कथित Sexual Exploitation मामले में दर्ज पाक्सो केस में नामजद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है. शुक्रवार को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अंतरिम राहत मंजूर की और फैसला सुरक्षित करते हुए कहा कि अंतिम फैसला आने तक Sexual Exploitation मामले में गिरफ्तारी पर रोक रहेगी. जस्टिस जितेन्द्र कुमार सिनहा की कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे. कोर्ट के बैठने का समय पूरा होने के बाद भी केस की सुनवाई जारी रही.

बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को नामजद और 2-3 को अज्ञात बताते हुए झूंसी थाने में Sexual Exploitation की गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है. इन सभी के खिलाफ बीएनएस की धारा 351 (3) के अलावा पाक्सो एक्ट की धारा 3, 4(2), 6, 16, 17 और 51 के तहत रिपोर्ट दर्ज करके जांच की जा रही है. Sexual Exploitation प्रकरण का घटनाक्रम 2025 में आयोजित महाकुंभ मेला और साल 2026 में आयोजित माघ मेले के दौरान शंकराचार्य का आश्रम बताया गया है.

घटना की रिपोर्ट आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दर्ज करायी गयी है. उन्होंने तहरीर में खुद को दोनों नाबालिग बच्चों का संरक्षक बताया है. तहरीर में कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद जो खुद को शंकराचार्य बताता है ने गुरुकुल में शिक्षा एवं सेवा के नाम पर दो नाबालिग बच्चों को आश्रम में रखा और उसके साथ दुष्कर्म (Sexual Exploitation) किया.

बच्चों को आश्रम में रखा और उसके साथ दुष्कर्म (Sexual Exploitation) किया

आरोप यह भी लगाया गया है कि दोनों बच्चों को नग्न अवस्था (Sexual Exploitation) में सोने के लिए विवश भी किया जाता था. उन्हें इस घटना का जिक्र किसी से करने पर गंभीर नतीजे भुगतने के लिए धमकाया भी जाता था. तहरीर के अनुसार अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम से किसी तरह से मुक्त होने के बाद दोनों आशुतोष ब्रह्मचारी के कैंप में पहुंचे और पूरी बात बताई.

इसके बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने इसकी शिकायत झूंसी पुलिस के साथ प्रयागराज पुलिस से की लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गयी. इसके बाद उन्होंने कोर्ट की शरण ली और Sexual Exploitation के गंभीर मामले में पुलिस रिपोर्ट दर्ज करके विवेचना करने का आदेश देने की गुहार लगायी.

पाक्सो एक्ट की स्पेशल कोर्ट प्रयागराज में बच्चों का बयान भी दर्ज कराया गया. इसके बाद कोर्ट ने पुलिस से सूचना मांगी. इसके बाद एफआईआर दर्ज करके विवेचना का आदेश दिया गया तो प्रयागराज के झूंसी थाने में 21 फरवरी को ​मुकदमा अपराध संख्या 58/2026 दर्ज किया गया.

मुकदमा दर्ज होने के बाद झूंसी पुलिस सक्रिय हो गयी और उसने Sexual Exploitation के पीड़ितों का मेडिकल टेस्ट कराया. बताया गया कि एक बच्चे का मेडिकल परीक्षण हो चुका है. इसके अलावा पुलिस ने अविमु​क्तेश्वरानंद की वाराणसी जनपद में मौजूदगी का पता चलने पर उनके यहां पहुंचने का प्रयास भी शुरू कर दिया.

इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से उनके अधिवक्ताओं ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी. इस याचिका पर सुनवाई के लिए शुक्रवार 27 फरवरी का दिन मुकर्रर किया गया था.

शुक्रवार शाम करीब एक घंटे से भी अधिक समय तक चली सुनवाई के बाद खचाखच भरी कोर्ट में जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ के समक्ष दोनों पक्षों के वकीलों ने अपना तर्क रखा. स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद की तरफ से पक्ष रखते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ दो दर्ज दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं.

इसमें गंभीर आरोप लगाये गये हैं. उनके खिलाफ हिस्ट्रीशीट खुली हुई है और पुलिस पहले उन पर 25000 रुपये का इनाम भी घोषित कर चुकी है. उन्होंने रंजिश के चलते यह मुकदमा दर्ज कराया है. जिन बटुकों के साथ दुष्कर्म (Sexual Exploitation) किये जाने का आरोप लगाया गया है वह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में कभी दाखिल ही नहीं हुए थे.

दूसरी पक्ष की ओर से इन तर्कों को खारिज करने का प्रयास किया गया. इसके बाद कोर्ट ने माना कि स्वामी अविमुक्तेश्वररानंद को इस केस का फैसला सुनाये जाने तक पुलिस गिरफ्तार नहीं करेगी. शुक्रवार को सुनवाई के बाद कोर्ट 8 मार्च तक के लिए बंद हो गयी. इससे संभावना जताई जा रही है कोर्ट अपना सुरक्षित किया गया फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में सुना सकती है.

यह फैसला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. सुनवाई से पहले ही कोर्ट नंबर 72 खचाखच भर गई थी. बचाव पक्ष ने एक पीड़ित को नाबालिग बताया. पीड़ितों की तरफ से अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया गया.