*TV 20 NEWS || AZAMGARH:आजमगढ़ में न्याय की जीत: ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या के मामले में कोर्ट ने दिए FIR दर्ज करने के आदेश*

आजमगढ़ में न्याय की जीत: ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या के मामले में कोर्ट ने दिए FIR दर्ज करने के आदेश
​सब-हेडलाइन: गम्भीरपुर थाना क्षेत्र का मामला; पुलिस पर लगा था लापरवाही का आरोप, अब कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद होगी एफआईआर
​आजमगढ़।
जनपद के गम्भीरपुर थाना क्षेत्र में रंजिश के चलते एक युवक की ट्रैक्टर से कुचलकर की गई निर्मम हत्या के मामले में स्थानीय अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष गम्भीरपुर को तत्काल सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना करने के आदेश दिए हैं।
​क्या है पूरा मामला?
प्रार्थिनी सविता पुत्री हीरालाल ने न्यायालय में धारा 173(4) बीएनएसएस (BNSS) के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। प्रार्थिनी के अनुसार, उसके भाई राम आशीष की हत्या के पीछे गांव के ही अजय कुमार पुत्र जगदीश का हाथ है। घटना 25 मार्च 2026 की है, जब राम आशीष अपने घर के पास दातून कर रहा था। तभी आरोपी अजय कुमार ट्रैक्टर लेकर आया और पुरानी रंजिश के चलते राम आशीष से कहासुनी करने लगा। आरोप है कि आक्रोशित होकर आरोपी ने जानबूझकर मृतक पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इलाज के दौरान अगले दिन 26 मार्च को उसकी मृत्यु हो गई।
​दबाव में कराया समझौता, पोस्टमार्टम तक नहीं होने दिया
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद आरोपी पक्ष ने मृतक के वृद्ध और निर्धन पिता पर भारी दबाव बनाया। उन्हें 15 लाख रुपये मुआवजे का प्रलोभन देकर 50 रुपये के स्टाम्प पेपर पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए गए। आरोपी पक्ष का मकसद कानूनी कार्रवाई से बचना था, जिसके चलते उन्होंने परिवार को पुलिस के पास जाने से रोका और मृतक का पोस्टमार्टम तक नहीं होने दिया।
​पुलिस पर लगा निष्क्रीयता का आरोप
जब आरोपी पक्ष ने मुआवजा देने का वादा पूरा नहीं किया और परिवार को अपने साथ हुए धोखे का अहसास हुआ, तो उन्होंने 23 मई 2026 को थाना गम्भीरपुर में शिकायत की। सुनवाई न होने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद, 29 मई की रात को आरोपी पक्ष द्वारा प्रार्थिनी के मकान की दीवार को ट्रैक्टर से गिराने का प्रयास भी किया गया।
​न्यायालय का आदेश
न्यायालय ने प्रार्थिनी के तर्कों और घटनाक्रम का संज्ञान लेते हुए इसे गंभीर अपराध माना है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थानाध्यक्ष गम्भीरपुर को आदेशित किया है कि वे इस आदेश की प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना शुरू करें।
​इस आदेश के बाद आरोपी पक्ष में हड़कंप मच गया है। पीड़ित परिवार ने अब न्याय की उम्मीद जताई है और पुलिस से मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
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