आजमगढ़। त्रिसरण बुद्ध बिहार, डा अम्बेडकर डा बाल विद्या मंदिर एवं जूनियर हाईस्कूल हरवंशपुर आजमगढ़ के तत्वावधान में हरंवशपुर स्थित परिसर में सेवानिवृत्तक डीएसपी चन्द्रदीप की अध्यक्षता में संविधान दिवस मनाया गया। जिसमे समिति, भिक्षु संघ तथा बालक-बालिकाओं ने भाग लिया।
बाल विद्या मंदिर के प्रबंधक व समिति के महामंत्री राजेन्द्र प्रसाद ने कहाकि भारतीय संविधान देश की धरोहर व प्रमुख दस्तावेज है। जो भारत की एकता व अखंडता को अक्षुण्य बनाए रखने की ताकत देता है तथा समता, स्वंतत्रता बंन्धुत्व, न्याय का मार्ग प्रशस्त करता है।
संविधान प्रारूप समिति अध्यक्ष तथा भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहब डा भीमराव अम्बेडकर, संविधान सभा के अध्यक्ष व राष्ट्रपति डा राजेन्द्र प्रसाद तथा संविधान निर्माता समिति के योगदान को याद करते हुए अध्यक्षीय संबोधन में चन्द्रदीप ने कहाकि हम भारतीयों का कर्तव्य बनता है कि हमारे महापुरूषों ने देश की स्वंतत्रता और गणतंत्र को स्थापित करने में जो अहम योगदान दिया है वह हम भारतवासियों के लिए गौरव का विषय है।
पंचम बाबू ने संविधान की प्रस्तावना पर प्रकाश डालते हुए कहाकि देश में कुछ लोग वंशगत रूप से समता स्वंतत्रता बन्धुत्व व न्याय की भावना के विरूद्ध है। ऐसे लोग संविधान को स्वीकार नहीं कर पा रहे है और उसे बदलने की नाकामयाब कोशिश कर रहे है। यह प्रवृत्ति देशद्रोह की श्रेणी में आता है, जनमत को इसे संज्ञान में लेना चाहिए।
उत्तर प्रदेशीय अनु. जाति अनु.जनजाति बेसिक शिक्षक महासंघ के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष व संरक्षक लालचन्द राम ने कहाकि बाबा साहब ने संविधान निर्माणी सभा में 25 नवंबर 1949 संसद में आखिरी वक्तव्य देते हुए कहा था कि 26 जनवरी 1950 को जब हमारा संविधान लागू होगा तो हम विरोधाभाव के जीवन में प्रवेश करने जा रहे है। जिसमे राजनीति के क्षेत्र में हम समान होंगे अर्थात एक व्यक्ति एक वोट और एक कीमत का सिद्धांत लागू होगा किंतु सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में हम गैर बराबर होंगे। इस गैर बराबरी को दूर नहीं किया गया तो जो लोग इससे पीड़ित है, वे लोग इस संवैधानिक व्यवस्था को ध्वस्त कर देंगे, जो बड़ी मेहनत से बनाया गया है।
इस अवसर पर भंते प्रज्ञाशील, पंचम बाबू, रामधनी, रामसमुझ, संजीव कुमार, सुधीर कुमार, रामविनय, रविभूषण, प्रियंका, डिम्पल यादव, सरोज, मीरा, गुड़िया, खुशबू आनंद, महिमा, कौशल्या आदि मौजूद रहे।






