आजमगढ़ : भगवान राम का चरित्र मानव के लिए अनुकरणीय है – पंडित कौशल किशोर जी महराज

  • आजमगढ़। शहर से सटे चकगोरया में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के प्रथम दिन प्रवचन करते हुए बाल व्यास पंडित कौशल किशोर जी महराज ने कहाकि भगवान राम का चरित्र मानव के लिए अनुकरणीय है। रामायण और रामचरित्र मानस का तुलनात्मक वर्णन करते हुए उन्होने कहाकि रामायण प्रभु श्रीराम का घर है और रामचरित्र मानस सर यानि तालाब है, अन्तर स्पष्ट है। कहाकि घर में प्रवेश पवित्र होकर किया जाता है। प्रभु श्रीराम का घर अर्थात मंदिर जिसमें प्रवेश करने के लिए पवित्र होना आवश्यक है, मंदिर में पवित्र होकर जाया जाता है। जबकि तालाब में पवित्र होने के लिए प्रवेश किया जाता है। उन्होने कहाकि जिनका मानस पटल पवित्र है। उनके लिए रामायण तक पहुंचने के लिए मानस प्रथम सोपान के रूप में विशिष्ट भूमिका रखता है। उन्होने कहाकि भगवान शिव की अर्धांगिनी माता सती शिव के सानिध्य में रहकर भी प्रभु श्रीराम के प्रभाव से परिचित नहीं हो पाई और परीक्षा लेने का दुराग्रह करने लगी। कहाकि भगवान न परीक्षा से मिलते है न समीक्षा से, मिलते है तो केवल प्रतिक्षा से। श्रीराम कथा आयोजन समिति द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा में पंडित आचार्य हरेन्द्र पाठक के द्वारा मानस पूजन कर श्रीराम कथा का शुभारम्भ किया गया। संचालन राय अनूप कुमार श्रीवास्तव ने किया।
    इस अवसर पर घनश्याम तिवारी, कैलाश नाथ चतुर्वेदी, नरेन्द्र सिंह, विनय राय, अमन, हर्षित श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव, निर्भय गाजीपुर, सुभाष चन्द्र तिवारी कुन्दन, रवि श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।