डॉ० निधि सिंह
अतिथि प्रवक्ता, हिंदी विभाग
महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ (उ० प्र०)
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं एवं दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। भारत में वर्तमान समय में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी लगभग 15 प्रतिशत के आसपास है, जो वैश्विक औसत (लगभग 26–27%) से कम है। ऐसे में यह अधिनियम न केवल लैंगिक समानता को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकता है, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया को भी अधिक समावेशी और संवेदनशील बना सकता है।
पंचायत और नगर निकाय स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देकर सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं,इसलिए अब यह कदम महिलाओं को नीतियों के निर्माणकर्ता के रूप में एक सशक्त प्रावधान है । आज देश में लाखों निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्थानीय शासन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं प्रभावी नेतृत्व प्रदान करती हैं। ऐसे में अब समय है कि आधी आबादी को उसका अधिकार दिया जाए और सभी स्थानों पर जहां उनसे जुड़े निर्णय लिए जाएं उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए ।





