आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए गर्भवती को स्वस्थ व सुपोषित बनाना उनकी प्राथमिकता
गृह-भ्रमण के दौरान महिलाओं व परिवार के सदस्यों को किया जा रहा जागरूक
आजमगढ़, 20 जनवरी 2022
आँगनबाड़ी कार्यकर्ता कुपोषित व अतिकुपोषित शिशु का वजन लेने एवं पोषण के प्रति गर्भवती व धात्री माताओं को जागरूक करने में बड़ी जिम्मेदारी निभा रहीं हैं | बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) केके सिंह ने बताया कि पोषण के प्रति अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने व गर्भवती को स्वस्थ व सुपोषित बनाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोदभराई व अन्नप्राशन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं | इसके साथ ही गृह भ्रमण कर गर्भवती व धात्री माताओं, बच्चों व किशोर–किशोरियों को पोषण की जानकारी दी जा रही है।
सीडीपीओ ने बताया कि ब्लॉक पल्हनी में पांच वर्ष तक के 630 बच्चे अतिकुपोषित यानी लाल श्रेणी के हैं, जबकि 1635 बच्चे मध्यम कुपोषित यानी पीली श्रेणी और 17845 बच्चे सामान्य यानी हरी श्रेणी के हैं। इसके साथ ही पल्हनी ब्लॉक में गर्भवती की संख्या 2396 व धात्री माता 2460 हैं । जिलें में कुल 5588 आँगनबाड़ी केन्द्र संचालित है जिसमें 5588 आँगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।
प्रथम त्रैमास वाली गर्भवती को शीघ्र पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जाता है व उनका वजन और लम्बाई नापी जाती है, ताकि उनके पोषण का स्तर जाना जा सके। दूसरी त्रैमास वाली गर्भवती का वजन लिया जाता है व स्वास्थ्य जांच होती है | आयरन व कैल्शियम तथा पौष्टिक आहार के सेवन की सलाह और इसके महत्व के बारे जानकारी दी जाती है । तृतीय त्रैमास वाली गर्भवती को आयरन व कैल्शियम के सेवन की सलाह के साथ ही प्रसव से पहले उन्हें क्या तैयारियां करनी है, इसकी जानकारी दी जाती है। उन्होने कहा कि अतिकुपोषित (सैम) और मध्यम कुपोषित (मैम) का मुख्य कारण माँ का कुपोषित होना है| जन्म के समय शिशु का वजन कम होने के कारण, गर्भावस्था के दौरान जागरूकता की कमी,पोषण युक्त भोजन का अभाव एवं बच्चे को स्तनपान न कराना, समय से ऊपरी आहार का शुरू न करना या कम मात्रा में ऊपरी आहार देना, साथ ही स्वच्छता की कमी भी कुपोषित होने का कारण हो सकता है।
ब्लॉक पल्हनी आंगनबाड़ी केंद्र – डुगडुगवा केंद्र की आँगनबाड़ी कार्यकर्ता सरिता सिंह ने बताया कि एनीमिया, स्वच्छता एवं सफाई, पौष्टिक आहार तथा डायरिया निवारण से संबंधित कार्यक्रमों एवं योजनाओं के संबंध में गृह-भ्रमण के दौरान महिलाओं व परिवार के सदस्यों को जागरूक कर रही हैं। इसके साथ ही कोविड से बचाव के लिए दो गज दूरी, मास्क का प्रयोग करने के लिए जागरूक कर रही हूँ। छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान तथा छह माह से दो वर्ष तक की आय़ु के बच्चों के लिए स्तनपान के साथ-साथ पूरक आहार की महत्ता, खून की कमी से होने वाली परेशानियों तथा इसके लिए किये जाने वाले प्रयासों, संस्थागत प्रसव, डायरिया प्रबंधन के संबंध में जानकारी भी दे रही हैं। प्रतिदिन आहार में दाल,सोयाबीन,साबूतअनाज,विटामिन-सी युक्त मौसमी सब्जियां व नींबू,आंवला,संतरा,गाजर आदि को शामिल करने के बारे में जागरूक कर रही हैं। इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है और खून की कमी दूर होती है।
ब्लॉक डुगडुगवा की नौ माह की राधिका की माता आरती देवी बताया कि जन्म से मेरी बच्ची बहुत कमजोर थी। आंगनबाड़ी दीदी के सहयोग से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बच्ची की जांच हुई व वजन लिया गया, तब अंशिका पोषण स्तर में लाल श्रेणी में थी। दीदी के निगरानी में आज हमारी बच्ची हरी श्रेणी में आ गई है।
गर्भवती अवराना ने कहा कि आंगनबाड़ी दीदी ने मेरी नियमित स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण के साथ ही मेरा पंजीकरण करवाई। साथ ही साप्ताहिक गृह-भ्रमण कर हमें पोषण के लिए हरी साग-सब्जियों का प्रयोग करने को कहती हैं।






